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गुरुवार, 22 नवंबर 2018

परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें भाग दो


परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें भाग दो


परमेश्वर के मार्ग पर चलें: परमेश्वर का भय मानें और बुराई से दूर रहें

एक कहावत है जिस पर तुम सब को ध्यान देना चाहिए। मेरा मानना है कि यह कहावत अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मेरे मन में हर दिन अनगिनत बार आती है।

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है


परमेश्वर को जानना परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने का मार्ग है
तुम में से प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर में विश्वास करके नए सिरे से अपने जीवन की जांच करके यह देख सकता है कि क्या परमेश्वर को खोजते समय, तुम सच्चे रूप में समझ पाए हो, सच्चे रूप में पूर्णत: समझ गये हो, और सच्चे रूप में परमेश्वर को जाने हो, और यह कि तुम सच्चे रूप में जान गये हो कि, विभिन्न मनुष्यों के प्रति परमेश्वर का मनोभाव क्या है, और यह कि तुम वास्तव में यह समझ गये हो कि परमेश्वर तुम पर क्या कार्य कर रहा है और परमेश्वर कैसे उसके प्रत्येक कार्य को व्यक्त करता है।

सोमवार, 19 नवंबर 2018

परमेश्वर ने बचाया है मुझे


  • परमेश्वर ने बचाया है मुझे
  •  
  • I
  • परमेश्वर ने बचाया है मुझे।
  • मानव सा देहधारी हुआ, सह कर आँधी-तूफान,
  • मनुष्यों में छिप कर, कोई उसे न जान सका।
  • मुझे बचाने को न्याय किया, शुद्ध करने को ताड़ना दिया;
  • जिसमें दर्द मैंने सहे।

शनिवार, 17 नवंबर 2018

सभी चीज़ों में परमेश्वर के आयोजन को मैं सर्मपित हो जाऊँगा


  • सभी चीज़ों में परमेश्वर के आयोजन को मैं सर्मपित हो जाऊँगा
  •  
  • I
  • परमेश्वर, तूने बनाए मानव,
  • तेरी प्रभुता उन पर राज करे।
  • तूने चुना मुझे और सक्षम किया
  • लौटने को तेरे सिंहासन के समक्ष।

सोमवार, 12 नवंबर 2018

परमेश्वर इंसान को अधिकतम सीमा तक बचाना चाहता है


  • परमेश्वर इंसान को अधिकतम सीमा तक बचाना चाहता है
  •  
  • I
  • अपने उद्धार कार्य के दौरान,
  • जिनको बचाया जा सकता है,
  • अधिकतम सीमा तक उन्हें बचाएगा परमेश्वर,
  • और त्यागेगा किसी को नहीं परमेश्वर।

शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

शरीर त्यागने का अभ्यास


  • शरीर त्यागने का अभ्यास
  •  
  • I
  • गर ऐसा कुछ हो जाए जिसमें सहनी पड़ें मुश्किलेंतुझे,
  • तो उस वक्त परमेश्वर की इच्छा को समझ और ध्यान में रख।
  • ख़ुद को संतुष्ट न कर, ख़ुद को दरकिनार कर।
  • शरीर से अधम और कुछ भी नहीं।

सोमवार, 5 नवंबर 2018

समय जो गँवा दिया कभी वापस न आएगा


  • समय जो गँवा दिया कभी वापस न आएगा
  •  
  • I
  • जागो भाइयो! जागो बहनो!
  • परमेश्वर का दिन विलम्ब नहीं करेगा।
  • वक्त जीवन है, वक्त को पकड़ने से बचता जीवन है।

रविवार, 4 नवंबर 2018

परमेश्वर के वचनों की महत्ता


  • परमेश्वर के वचनों की महत्ता
  •  
  • I
  • परमेश्वर के विश्वासियों का कम से कम बर्ताव बेहतर होना चाहिये।
  • है सबसे अहम परमेश्वर के वचन रखना।
  • चाहे कुछ हो जाए, परमेश्वर के वचन से दूर न जाना।
  • परमेश्वर को जानना, ख़ुश करना, होता है उसके वचन से।

शनिवार, 3 नवंबर 2018

इंसान के प्रति परमेश्वर का रवैया


  • इंसान के प्रति परमेश्वर का रवैया
  •  
  • I
  • जब लोगों के दुष्ट काम परमेश्वर को करते हैं अपमानित,
  • तो वो बरसाएगा उन पर अपना क्रोध,
  • जब तक वे सही में करते नहीं उसके सामने पश्चाताप।

गुरुवार, 1 नवंबर 2018

स्वभाव में बदलाव है मुख्यत: प्रकृति में बदलाव


  • स्वभाव में बदलाव है मुख्यत: प्रकृति में बदलाव
  •  
  • I
  • स्वभाव में बदलाव है प्रकृति में बदलाव।
  • नहीं दिखती प्रकृति किसी के व्यवहार में,
  • इसमें शामिल हैं अर्थ और मोल जीवन के,
  • इसमें शामिल हैं मूल्य इंसानी जीवन के,
  • इसमें शामिल हैं आत्मा की गहरी बातें, सार इंसान के अस्तित्व का।

सोमवार, 29 अक्टूबर 2018

परमेश्वर के कार्य के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाओ


  • परमेश्वर के कार्य के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाओ

  •  
  • I
  • अन्य जातियों के बीच हो चुका है शुरू काम उसका।
  • तेज़ी से और प्रभावी ढंग से काम करने के लिए,
  • वो सभी सृजित प्राणियों को वर्गों में है बांटता।

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

चाहे जो भी करे परमेश्वर, उसका अंतिम लक्ष्य है उद्धार


  • चाहे जो भी करे परमेश्वर, उसका अंतिम लक्ष्य है उद्धार
  •  
  • I
  • परमेश्वर अपना कार्य सब पर करता है।
  • चाहे कैसे भी वो करता है,
  • या किसी भी रूप में,
  • लहज़ा जिसमें वो बात करता है,
  • है बस एक ही, एक अंतिम उद्देश्य:
  • उद्धार तुम्हारा, उद्धार तुम्हारा।

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018

परमेश्वर के वचनों का एक भजन सत्य का अभ्यास करोगे तो बदल जाएगा स्वभाव तुम्हारा




  • सत्य का अभ्यास करोगे तो बदल जाएगा स्वभाव तुम्हारा

  • I
  • सत्य का अभ्यास सुधार सकता है दूषित स्वभाव को।
  • सत्य का अभ्यास सुधार सकता है दूषित स्वभाव को।
  • सत्य पर संगति नहीं है इंसान को ख़ुश करने के लिये।
  • ये है अमल के लिये, बदलाव के लिये।

शुक्रवार, 19 अक्टूबर 2018

प्रायश्चित्त


  • प्रायश्चित्त
  •  
  • I
  • अच्छे इरादे, अंत के दिनों का मशवरा,
  • जगाते हैं गहरी नींद से इंसान को।
  • दर्दभरी यादें, बचे दाग़ यातना देते हैं मेरे ज़मीर को।
  • उलझन में, डरकर प्रार्थना करता हूँ मैं।

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2018

अंत तक परमेश्वर के प्रति वफ़ादार


  • अंत तक परमेश्वर के प्रति वफ़ादार
  •  
  • I
  • जिस दिन छोड़ गए तुम हमें, चेहरे पर थी तुम्हारे मुस्कुराहट।
  • हाथ हिलाकर अलविदा किया तुमने।
  • उदास मन से देखा था हमने तुम्हें जाते हुए।
  • मुझे मालूम था कलीसिया को थी तुम्हारी ज़रूरत,
  • इसलिए रोक नहीं पाया मैं तुम्हें।

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

परमेश्वर की इंसान से अंतिम अपेक्षा


  • परमेश्वर की इंसान से अंतिम अपेक्षा
  •  
  • I
  • अगर तू सेवा करने वाला है,
  • तो क्या वफादारी से कर सकता है सेवा परमेश्वर की,
  • बिना निष्क्रिय या बिना लापरवाह हुए?
  • जान ले तू अगर, कभी सराहता नहीं तुझे परमेश्वर,
  • जीवनभर सेवा करेगा फिर भी तू डटा रहकर?

सोमवार, 15 अक्टूबर 2018

परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने


  • परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने
  •  
  • I
  • इंसान की कद-काठी, ज्ञान, प्रेम, आस्था,
  • आज्ञाकारिता और जो कुछ देखता है इंसान,
  • आया है वो सब वचन के न्याय से।
  • टिकी है आस्था तुम्हारी उसके वचन से।
  • देखता है इंसान परमेश्वर के अद्भुत कार्य को इसके ज़रिये।

रविवार, 7 अक्टूबर 2018

जीवन एक नये इंसान का


  • जीवन एक नये इंसान का

  •  
  • I
  • चमकते चांद के मानिंद हैं वचन खुदा के,
  • जो मेरे मन को, मेरी नज़र को निर्मल करें।
  • करते रोशन और प्रबुद्ध मुझे,
  • नव-जागृत होता हृदय मेरा।

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018

देहधारी परमेश्वर ही बचा सकता है इंसान को पूरी तरह


  • देहधारी परमेश्वर ही बचा सकता है इंसान को पूरी तरह
  •  
  • I
  • किसी आत्मा के ज़रिये या आत्मा के रूप में
  • नहीं आता परमेश्वर इंसान को बचाने,
  • जिसे कोई देख न पाए, छू न पाए, न जिस तक इंसान पहुँच पाए।

शनिवार, 29 सितंबर 2018

संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन


संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के कथन - सोलहवाँ कथन

ऐसा बहुत कुछ है जो मैं मनुष्य से कहना चाहता हूँ, बहुत सी चीजें हैं जो मुझे उसे अवश्य बतानी चाहिए। परन्तु मनुष्य में स्वीकृति की योग्यताओं का अत्यधिक अभाव हैः मेरे वचनों को, जिस अनुसार मैं प्रदान करता हूँ, उस अनुसार समझने में पूरी तरह से अक्षम है, और केवल एक ही पहलू को वह समझता है किन्तु दूसरे के प्रति अनभिज्ञ रहता है।

46. "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का वास्तविक अर्थ

झांग जुन शेन्यांग शहर, लियाओनिंग प्रांत अतीत में, मैं मानता था कि "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का अर्थ परमेश्वर के साथ विश्व...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ओवरसीज हॉटलाइन