- इंसान के प्रति परमेश्वर का रवैया
- I
- जब लोगों के दुष्ट काम परमेश्वर को करते हैं अपमानित,
- तो वो बरसाएगा उन पर अपना क्रोध,
- जब तक वे सही में करते नहीं उसके सामने पश्चाताप।
- जब लोग रखते हैं परमेश्वर का विरोध करना जारी,
- उसका क्रोध तब तक नहीं रुकेगा,
- जब तक वे हो जाते नहीं हैं नष्ट, नहीं हैं नष्ट।
- यह है परमेश्वर का स्वभाव।
- दूसरे शब्दों में, परमेश्वर की दया या क्रोध
- निर्भर है इंसान के कर्मों और परमेश्वर के लिए उसके रवैये पर,
- उसके रवैये पर।
- II
- अगर परमेश्वर अपने क्रोध को किसी एक व्यक्ति पर बरसाता रहता है,
- तो इसका अर्थ है कि ये व्यक्ति निस्संदेह करता है परमेश्वर का विरोध,
- क्योंकि उसने सही में कभी नहीं किया पश्चाताप,
- कभी नहीं परमेश्वर के सामने झुकाया अपना सिर,
- कभी नहीं परमेश्वर पर किया सच्चा विश्वास।
- कभी नहीं उसने परमेश्वर की दया और सहिष्णुता की हासिल।
- III
- अगर कोई अक्सर परमेश्वर की देखभाल है पाता,
- उसकी दया और सहिष्णुता है पाता,
- तो इसका अर्थ है
- कि ये व्यक्ति निस्संदेह तहेदिल से परमेश्वर पर करता है सच्चा विश्वास।
- उसका दिल परमेश्वर का नहीं करता विरोध।
- वह अक्सर परमेश्वर के सामने करता है पश्चाताप।
- इस व्यक्ति पर परमेश्वर का अनुशासन उतर सकता है,
- लेकिन उसका क्रोध नहीं, क्रोध नहीं, क्रोध नहीं।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-भजन के आॅडियो
शनिवार, 3 नवंबर 2018
इंसान के प्रति परमेश्वर का रवैया
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