- देहधारी परमेश्वर ही बचा सकता है इंसान को पूरी तरह
- I
- किसी आत्मा के ज़रिये या आत्मा के रूप में
- नहीं आता परमेश्वर इंसान को बचाने,
- जिसे कोई देख न पाए, छू न पाए, न जिस तक इंसान पहुँच पाए।
- परमेश्वर गर बचाता इंसान को रूह की तरह, न कि सृजित इंसान की तरह,
- तो उससे न कोई उद्धार पाता, न ही कोई बच पाता।
- परमेश्वर बनता है एक सृजित मानव, रखता है देह में अपने वचन।
- ताकि वो प्रदान कर सके अनुयायियों को अपने वचन।
- ताकि इंसान सुन सके, देख सके, पा सके उसके वचन।
- इसके ज़रिये इंसान को सचमुच बचाया जा सकता है उसके पापों से।
- II
- गर परमेश्वर देहधारी न होता, तो किसी इंसान को बचाना मुमकिन न होता,
- और महान उद्धार परमेश्वर का, किसी को न मिलता।
- गर परमेश्वर का आत्मा काम करता इंसान में,
- तो वो शैतान के हाथों मार दिया गया होता,
- या बंधक बना लिया गया होता,
- क्योंकि परमेश्वर के आत्मा को इंसान छू नहीं सकता,
- क्योंकि परमेश्वर के आत्मा को इंसान छू नहीं सकता।
- स्वर्ग से प्रार्थना करके नहीं पाता इंसान उद्धार,
- चूँकि इंसान शरीर है, इसलिये पाता है देहधारी परमेश्वर से उद्धार।
- वो न देख सकता है, न पहुँच सकता है परमेश्वर के आत्मा तक।
- वो जुड़ सकता है सिर्फ़ देहधारी परमेश्वर से।
- उसी के ज़रिये समझता है सत्य वो और पाता है पूरा उद्धार।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018
देहधारी परमेश्वर ही बचा सकता है इंसान को पूरी तरह
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