परमेश्वर मनुष्य के परिणाम को एवं उस मानक को कैसे निर्धारित करता है जिसके द्वारा वह मनुष्य के परिणाम को निर्धारित करता है
इससे पहले कि तेरे पास अपने स्वयं के कोई दृष्टिकोण या निष्कर्ष हो, तुझे पहले अपने प्रति परमेश्वर की मनोवृत्ति को समझना चाहिए, परमेश्वर क्या सोच रहा है, और तब निर्णय करना चाहिए कि तेरी अपनी सोच सही है या नहीं।