शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

शरीर त्यागने का अभ्यास


  • शरीर त्यागने का अभ्यास
  •  
  • I
  • गर ऐसा कुछ हो जाए जिसमें सहनी पड़ें मुश्किलेंतुझे,
  • तो उस वक्त परमेश्वर की इच्छा को समझ और ध्यान में रख।
  • ख़ुद को संतुष्ट न कर, ख़ुद को दरकिनार कर।
  • शरीर से अधम और कुछ भी नहीं।
  • तू परमेश्वर की खोज कर, उसे संतुष्ट कर, और अपना फर्ज़ पूरा कर।
  • परमेश्वर लाएगा इस मामले में
  • विशेष प्रबुद्धता ऐसे विचारों के संग,
  • और मिलेगी तेरे दिल को दिलासा।
  • II
  • जब तेरे साथ कुछ घटे,
  • तो तू ख़ुद को दरकिनार कर,
  • शरीर को हर चीज़ से तू अधम मान।
  • शरीर को तू जितना संतुष्ट करेगा,
  • उतनी ही ज़्यादा ये माँग करेगा, उतनी ही ज़्यादा ये छूट लेगा,
  • जितनी ये ख़्वाहिशें करेगा, उतना ही ये ऐयाश बनेगा।
  • शरीर उस हद तक जाएगा जहाँ ये
  • गहन धारणाएं पालेगा, परमेश्वर की अवज्ञा करेगा,
  • ख़ुद को ऊँचा उठाएगा, परमेश्वर के कार्य पर सन्देह करेगा।
  • III
  • साँप की मानिंद है शरीर इंसान का, ये नुकसान पहुँचाता है ज़िंदगी को।
  • जब ये अपनी मनमानी करता है पूरी तरह,
  • तो खो बैठते हो तुम ज़िंदगी पर अधिकार अपना।
  • शरीर होता है शैतान का।
  • फिज़ूल की ख़्वाहिशों के संग ये ख़ुदगर्ज़ होता है,
  • चाहता है सुख-सुविधा, आराम, सहूलियत और निष्क्रियता।
  • एक हद तक जब हो जाएगा संतुष्ट ये,
  • तो आख़िरकार निगल जाएगा तुम्हें भी ये।
  • गर ऐसा कुछ हो जाए जिसमें सहनी पड़ें मुश्किलेंतुझे,
  • तो उस वक्त परमेश्वर की इच्छा को समझ और ध्यान में रख।
  • ख़ुद को संतुष्ट न कर, ख़ुद को दरकिनार कर।
  • शरीर से अधम और कुछ भी नहीं।
  • तू परमेश्वर की खोज कर, उसे संतुष्ट कर, और अपना फर्ज़ पूरा कर।
  • परमेश्वर लाएगा इस मामले में
  • विशेष प्रबुद्धता ऐसे विचारों के संग,
  • और मिलेगी तेरे दिल को दिलासा।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-भजन के आॅडियो

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