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मौन है परमेश्वर, सामने हमारे कभी प्रकट हुआ नहीं,
फिर भी कार्य उसका कभी रुका नहीं।
नज़र रखता है पूरी धरती पर, नियंत्रित करता है हर चीज़ को।
देखता है इंसान के सभी शब्दों को और काम को।
उसकी योजना के मुताबिक पूरा होता है धीरे-धीरे उसका प्रबंधन।
ख़ामोश, मगर बढ़ते हैं इंसान के करीब उसके कदम।
न्याय-पीठ उसकी तैनात होती है कायनात में,
उसके बाद होता है अवरोहण उसके सिंहासन का हमारे मध्य में,
उसके सिंहासन का हमारे मध्य में।

