अवतरण लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अवतरण लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 16 दिसंबर 2018

परमेश्वर के वचनों का एक भजन ख़ामोशी से आता है हमारे मध्य परमेश्वर




I
मौन है परमेश्वर, सामने हमारे कभी प्रकट हुआ नहीं,
फिर भी कार्य उसका कभी रुका नहीं।
नज़र रखता है पूरी धरती पर, नियंत्रित करता है हर चीज़ को।
देखता है इंसान के सभी शब्दों को और काम को।
उसकी योजना के मुताबिक पूरा होता है धीरे-धीरे उसका प्रबंधन।
ख़ामोश, मगर बढ़ते हैं इंसान के करीब उसके कदम।
न्याय-पीठ उसकी तैनात होती है कायनात में,
उसके बाद होता है अवरोहण उसके सिंहासन का हमारे मध्य में,
उसके सिंहासन का हमारे मध्य में।

गुरुवार, 22 नवंबर 2018

परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें भाग दो


परमेश्वर के स्वभाव और उसके कार्य के परिणाम को कैसे जानें भाग दो


परमेश्वर के मार्ग पर चलें: परमेश्वर का भय मानें और बुराई से दूर रहें

एक कहावत है जिस पर तुम सब को ध्यान देना चाहिए। मेरा मानना है कि यह कहावत अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मेरे मन में हर दिन अनगिनत बार आती है।

बुधवार, 14 नवंबर 2018

परमेश्वर की इंसान को चेतावनी



परमेश्वर की इंसान को चेतावनी

I
बहुत-सी इच्छाएँ हैं परमेश्वर की। उसकी इच्छा है, तू आचरण अपना बेहतर रख सके, अपने फ़र्ज़ में वफ़ादार रहे, सत्य और इंसानियत हो तुझमें, इंसानियत हो तुझमें। बन सके एक ऐसा इंसान, जो परमेश्वर की ख़ातिर अपना सबकुछ दे सके, अपनी ज़िंदगी के अलावा और भी बहुत कुछ दे सके, बहुत कुछ दे सके।

मंगलवार, 13 नवंबर 2018

स्वभाव में बदलाव वास्तविक जीवन से अलग नहीं हो सकता


  • स्वभाव में बदलाव वास्तविक जीवन से अलग नहीं हो सकता
  •  
  • परमेश्वर में विश्वास करने में,
  • यदि मानव बदलाव लाना चाहता है,
  • तो उसे अपने वास्तविक जीवन से
  • खुद को वियुक्त नहीं करना चाहिए।

शुक्रवार, 2 नवंबर 2018

परमेश्वर के लिए तुम्हारा विश्वास हो सबसे ऊँचा


  • परमेश्वर के लिए तुम्हारा विश्वास हो सबसे ऊँचा
  •  
  • I
  • गर चाहते हो तुम करना यक़ीन,
  • गर पाना चाहते हो तुम परमेश्वर को और उसकी संतुष्टि,
  • गर तुम दर्द न सहो और मेहनत न करो,
  • तुम इन चीज़ों को प्राप्त नहीं कर सकोगे।

बुधवार, 17 अक्टूबर 2018

परमेश्वर लाया है इंसान को नए युग में


  • परमेश्वर लाया है इंसान को नए युग में
  •  
  • I
  • परमेश्वर का कार्य राह दिखाता है पूरी कायनात को,
  • चमकती है सीधे बिजली पूरब से पश्चिम को।
  • फैलाता है अन्य देशों में अपना कार्य परमेश्वर।
  • चमकती है उसकी महिमा पूरी कायनात पर।

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

परमेश्वर की इंसान से अंतिम अपेक्षा


  • परमेश्वर की इंसान से अंतिम अपेक्षा
  •  
  • I
  • अगर तू सेवा करने वाला है,
  • तो क्या वफादारी से कर सकता है सेवा परमेश्वर की,
  • बिना निष्क्रिय या बिना लापरवाह हुए?
  • जान ले तू अगर, कभी सराहता नहीं तुझे परमेश्वर,
  • जीवनभर सेवा करेगा फिर भी तू डटा रहकर?

सोमवार, 15 अक्टूबर 2018

परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने


  • परमेश्वर के देहधारण का अधिकार और मायने
  •  
  • I
  • इंसान की कद-काठी, ज्ञान, प्रेम, आस्था,
  • आज्ञाकारिता और जो कुछ देखता है इंसान,
  • आया है वो सब वचन के न्याय से।
  • टिकी है आस्था तुम्हारी उसके वचन से।
  • देखता है इंसान परमेश्वर के अद्भुत कार्य को इसके ज़रिये।

रविवार, 14 अक्टूबर 2018

परमेश्वर को बेहतर जान सकते हैं लोग वचनों के कार्य के ज़रिये


  • परमेश्वर को बेहतर जान सकते हैं लोग वचनों के कार्य के ज़रिये
  •  
  • I
  • अंत के दिनों का परमेश्वर मुख्यतः
  • प्रयोग करता है वचन पूर्ण करने के लिए इंसान को,
  • न कि संकेतों या चमत्कारों का, उसे दबाने या मनाने के लिए,
  • क्योंकि ज्ञात नहीं होती इनसे सामर्थ्य परमेश्वर की।

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2018

देहधारी परमेश्वर ही बचा सकता है इंसान को पूरी तरह


  • देहधारी परमेश्वर ही बचा सकता है इंसान को पूरी तरह
  •  
  • I
  • किसी आत्मा के ज़रिये या आत्मा के रूप में
  • नहीं आता परमेश्वर इंसान को बचाने,
  • जिसे कोई देख न पाए, छू न पाए, न जिस तक इंसान पहुँच पाए।

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

New Hindi Christian Song 2018 | भ्रष्ट मानवता को आवश्यकता है परमेश्वर द्वारा उद्धार की

New Hindi Christian Song 2018 |भ्रष्ट मानवता को आवश्यकता है परमेश्वर द्वारा उद्धार की

भ्रष्ट मानवता को आवश्यकता है परमेश्वर द्वारा उद्धार की दूषित मानवता को चाहिये देहधारी परमेश्वर का कार्य। दूषित मानवता को चाहिये देहधारी परमेश्वर का कार्य। देह बना परमेश्वर क्योंकि, शैतान की रूह नहीं है लक्ष्य उसका, ना अन्य कोई चीज़ है, बस मानव है लक्ष्य उसके काम का।

शनिवार, 21 अप्रैल 2018

जो जहाँ से आया है वहीं लौट जाएगा


युग-युगांतर से सभी लोग अस्तित्व के उन्हीं नियमों का पालन करते चले आ रहे हैं; इंसान तुतलाने से लेकर बाल सफ़ेद होने तक, जीवन की आपाधापी में लगा रहता है, जब तक कि वह ख़ाक में न मिल जाए...

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

हम क्यों जीवित हैं? और हमें करना क्यों पडता है?


परमेश्वर कहते हैं: “जो लोग मर जाते हैं वे जीवितों की कहानियों को अपने साथ ले जाते हैं और जो जीवित हैं वे मरे हुओं के वही त्रासदीपूर्ण इतिहास को दोहराते रहते हैं। मानवजाति बेबसी में स्वयं से पूछती हैः हम क्यों जीवित हैं? और हमें करना क्यों पडता है? यह संसार किसके आदेश पर चलता है? मानवजाति को किसने रचा है? क्या वास्तव में मानवजाति प्रकृति के द्वारा ही रची गई है? क्या मानवजाति वास्तव में स्वयं के भाग्य के नियंत्रण में है?”

46. "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का वास्तविक अर्थ

झांग जुन शेन्यांग शहर, लियाओनिंग प्रांत अतीत में, मैं मानता था कि "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का अर्थ परमेश्वर के साथ विश्व...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ओवरसीज हॉटलाइन