- परमेश्वर इंसान को अधिकतम सीमा तक बचाना चाहता है
- I
- अपने उद्धार कार्य के दौरान,
- जिनको बचाया जा सकता है,
- अधिकतम सीमा तक उन्हें बचाएगा परमेश्वर,
- और त्यागेगा किसी को नहीं परमेश्वर।
- मगर जो बदल नहीं सकते स्वभाव अपना,
- या जो पालन नहीं कर सकते परमेश्वर की आज्ञा का,
- ऐसे लोग दण्ड के भागी होंगे।
- II
- इस चरण के कार्य से, वचनों के कार्य से,
- इंसान के सामने ऐसे रास्ते खुलेंगे,
- इंसान के सामने ऐसे राज़ खुलेंगे
- समझता नहीं है इंसान जिन्हें।
- इससे इंसान परमेश्वर की इच्छा से वाकिफ़ होगा,
- परमेश्वर की अपेक्षाओं से वाकिफ़ होगा।
- ताकि परमेश्वर के वचनों को अमल में लाकर,
- बदल सके स्वभाव अपना इंसान।
- III
- अपने कार्य के लिए बस वचन, इस्तेमालकरता है परमेश्वर।
- इन्सान के थोड़े-से विद्रोह के लिये,
- सज़ा नहीं देता है उसे परमेश्वर
- क्योंकि अब उद्धार का वक्त है।
- सभी विद्रोहियों को गर सज़ा देता परमेश्वर
- तो किसी को नहीं मिलता बचाए जाने का अवसर।
- नरक में पड़े होते सभी सज़ा पाकर।
- न्याय के वचन से इंसान ख़ुद को जानकर,
- परमेश्वर की आज्ञा मानता है,
- न्याय के इन वचनों से इंसान सज़ा नहीं पाता है।
- IV
- जो वचनों की विजय को स्वीकारेंगे,
- उनके उद्धार के अवसर होंगे बहुतेरे।
- परमेश्वर का उद्धार कार्य
- उनके प्रति नर्म और सहिष्णु होगा।
- अगर गलत राह से इंसान लौट आएगा,
- अगर इंसान पश्चाताप करेगा,
- तो परमेश्वर उद्धार का अवसर देगा।
- V
- जब पहली बार इंसान विद्रोह करता है परमेश्वर से,
- तो परमेश्वर उसे मौत नहीं देना चाहता है,
- बल्कि उसे बचाने की ख़ातिर, वो सबकुछ ही करता है।
- जब किसी को बचाने की गुंजाईश नहीं होती,
- तो दरकिनार कर देता है उसे परमेश्वर।
- सज़ा को टालता है परमेश्वर,
- क्योंकि जिन्हें बचाया जा सकता है, उन्हें बचाना चाहता है परमेश्वर।
- महज़ वचनों से वो न्याय, रहनुमाई करता है, प्रबुद्ध करता है इंसान को,
- छड़ से मारता नहीं वो इंसान को।
- वचनों से बचाना मकसद है,
- मायने हैं इस आख़िरी चरण के कार्य के।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
चमकती पूर्वी बिजली, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का सृजन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकट होने और उनका काम, परमेश्वर यीशु के दूसरे आगमन, अंतिम दिनों के मसीह की वजह से किया गया था। यह उन सभी लोगों से बना है जो अंतिम दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और उसके वचनों के द्वारा जीते और बचाए जाते हैं। यह पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था और चरवाहे के रूप में उन्हीं के द्वारा नेतृत्व किया जाता है। इसे निश्चित रूप से किसी मानव द्वारा नहीं बनाया गया था। मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है। परमेश्वर की भेड़ परमेश्वर की आवाज़ सुनती है। जब तक आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, आप देखेंगे कि परमेश्वर प्रकट हो गए हैं।
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