रविवार, 11 नवंबर 2018

देह में परमेश्वर के कार्य का मुख्य प्रयोजन


  • देह में परमेश्वर के कार्य का मुख्य प्रयोजन
  •  
  • I
  • है इसलिये देह में परमेश्वर का आगमन,
  • देख सके परमेश्वर का असली कार्य इंसान।
  • निराकार आत्मा होता है देह में साकार,
  • छू सकें उसे लोग, देख सकें उसका आकार।
  • लिहाज़ा, पूर्ण बनाता है वो जिनको,
  • वो लोग उसे जिएँगे,
  • उसे हासिल होंगे और उसके दिल के मुताबिक होंगे।
  • आया है धरती पर, एक मिसाल कायम करने परमेश्वर,
  • उनके लिये आदर्श बनने, जिन्हें हासिल करेगा परमेश्वर।
  • इस तरह वे जान सकते हैं उसे, छू सकते हैं, देख सकते हैं उसे।
  • तभी हासिल कर सकता है उन्हें परमेश्वर।
  • II
  • अगर स्वर्ग से ही बोलता परमेश्वर,
  • और न आता वो धरती पर,
  • तो लोग उसे जान न पाते,
  • खोखले सिद्धांतों के सहारे, बस उसके कार्यों का प्रचार करते,
  • परमेश्वर के वचनों की हकीकत न होती पास उनके।
  • आया है धरती पर, एक मिसाल कायम करने परमेश्वर,
  • उनके लिये आदर्श बनने, जिन्हें हासिल करेगा परमेश्वर।
  • इस तरह वे जान सकते हैं उसे, छू सकते हैं, देख सकते हैं उसे।
  • तभी हासिल कर सकता है उन्हें परमेश्वर।
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  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
चमकती पूर्वी बिजली, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का सृजन सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकट होने और उनका काम, परमेश्वर यीशु के दूसरे आगमन, अंतिम दिनों के मसीह की वजह से किया गया था। यह उन सभी लोगों से बना है जो अंतिम दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और उसके वचनों के द्वारा जीते और बचाए जाते हैं। यह पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था और चरवाहे के रूप में उन्हीं के द्वारा नेतृत्व किया जाता है। इसे निश्चित रूप से किसी मानव द्वारा नहीं बनाया गया था। मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन है। परमेश्वर की भेड़ परमेश्वर की आवाज़ सुनती है। जब तक आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, आप देखेंगे कि परमेश्वर प्रकट हो गए हैं।

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