- सत्य का अभ्यास करोगे तो बदल जाएगा स्वभाव तुम्हारा
- I
- सत्य का अभ्यास सुधार सकता है दूषित स्वभाव को।
- सत्य का अभ्यास सुधार सकता है दूषित स्वभाव को।
- सत्य पर संगति नहीं है इंसान को ख़ुश करने के लिये।
- ये है अमल के लिये, बदलाव के लिये।
- ये है अमल के लिये, बदलाव के लिये।
- सत्य की समझ है तुम्हें मगर अमल नहीं करते
- तो बेकार है सारी समझ।
- सत्य को पाने का अवसर गँवा दोगे,
- तुम ख़ुद को बचाए जाने का अवसर गँवा दोगे।
- कुछ कहते हैं समस्या दूर न होगी सत्य के अमल से।
- कुछ मानते हैं समस्या पूरी तरह हल नहीं हो सकती सत्य से।
- मगर सारी समस्या हल हो सकती इंसानों की।
- तो सत्य के अनुसार चलना अहम है।
- अगर अमल करते हो उस सच पे जो तुम समझते हो,
- तो तुम और, अधिक गहरा सच पाओगे,
- राह दिखाएगा पवित्र आत्मा और तुम प्रबुद्ध हो जाओगे।
- अगर अमल करोगे सच पर तो, और, अधिक गहरा सच पाओगे,
- और परमेश्वर से उद्धार पाओगे, और परमेश्वर से उद्धार पाओगे।
- II
- कैंसर जैसा रोग नहीं हैं तुम लोगों की परेशानियाँ,
- अगर सत्य को अमल में लाओगे तो हल हो जाएंगी तुम्हारी परेशानियाँ।
- सही राह पर मिलेगी कामयाबी तुम्हें।
- जब कोई सच की राह पर चलता है, तो उसका स्वभाव बदलता है।
- मगर अपने स्वभाव पर चलने पर, कोई नहीं बदलता है।
- कुछ उलझे हैं अपनी चिंताओं में,
- उस सत्य पर नहीं करते अमल जो सामने है।
- बुनियादी तौर पर पीड़ित, आशीषित हैं, लेते नहीं मगर अनुभव फलों का।
- राह है अमल के लिये जिससे, दोष घातक निकल जाएंगे।
- सजग और सतर्क रहो मगर, कर लो बर्दाश्त ज़्यादा मुश्किलें।
- विवेकी दिल चाहिये, परमेश्वर में विश्वास के लिये।
- यूँ ही चलोगे अगर, तो क्या भरोसा कर सकते हो पूरे तौर से?
- अगर अमल करते हो उस सच पे जो तुम समझते हो,
- तो तुम और, अधिक गहरा सच पाओगे,
- राह दिखाएगा पवित्र आत्मा और तुम प्रबुद्ध हो जाओगे।
- अगर अमल करोगे सच पर तो, और, अधिक गहरा सच पाओगे,
- और परमेश्वर से उद्धार पाओगे, और परमेश्वर से उद्धार पाओगे।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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