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शनिवार, 15 दिसंबर 2018

आराधना गीत एक नया व्यक्ति बनो और परमेश्वर के दिल को दो तसल्ली




आराधना गीत एक नया व्यक्ति बनो और परमेश्वर के दिल को दो तसल्ली

I
तुमने झांका है मेरे दिल में, भरा है अहंकार मुझ में।
मुझे लगता है हूँ बहुत अच्छा मैं, हर चीज़ से हूँ ऊपर मैं।
सबसे श्रेष्ठ और आत्मसंतुष्ट, मेरी प्रकृति बदलना है मुश्किल।
अवमानना से परे, मैं हूँ अधम।
मानवता खो गई है। मानवता खो गई है।
मेरा दिल पिघलाते हैं तुम्हारे वचन। तुम्हारे सामने आया हूँ मैं।
तुम्हारे वचनों के अनुसार जीना चाहता हूँ मैं,
जीवन की उजली राह पर चलना चाहता हूँ मैं।

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018

परमेश्वर के वचनों का एक भजन परमेश्वर के वचनों का अभ्यास और परमेश्वर को संतुष्ट करना सबसे पहले आता है




I
आज, तुम लोगों से जो प्राप्त, करने की उम्मीद की जाती है,
वे अतिरिक्त मांगें नहीं है, बल्कि इंसान का कर्तव्य है,
जिसे हर किसी को पूरा करना चाहिए।
अगर तुम लोग नहीं अपना कर्तव्य, ठीक से पूरा कर सकते,
क्या तुम लोग नहीं दे रहे हो परेशानियों को आमंत्रण?
क्या तुम लोग नहीं दे रहे, मौत को दावत?
कैसे तुम लोग अभी भी भविष्य की कामना कर सकते?
परमेश्वर के काम में, इंसान को नहीं छोड़ना चाहिए कोई भी प्रयास,
परमेश्वर के काम में, इंसान को नहीं छोड़ना चाहिए कोई भी प्रयास।

मंगलवार, 4 दिसंबर 2018

परमेश्वर के वचनों का एक भजन परमेश्वर उन्हें प्रबुद्ध और रोशन करेगा जो सत्य की खोज करते हैं



I
अगर तुम देते हो ध्यान आसपास की हर चीज़ पर,
अगर तुम शुद्ध करते हो हर विचार और इच्छा,
अगर तुम करते हो शांत अपनी आत्मा,
तो चाहे कुछ भी बीते तुम पर, परमेश्वर के वचन करेंगे प्रेरित तुम्हें,
मिलेगा इलाज तुम्हें हर परेशानी का।
परमेश्वर के वचन करेंगे प्रेरित तुम्हें, एक दर्पण की तरह।
देखो उनके भीतर, मिलेगा चलने का रास्ता तुम्हें।
इलाज खोजने का है यह तरीका; हो जाएगी तुम्हारी बीमारी दूर।
ऐसी है परमेश्वर की सर्वशक्तिमत्ता। निश्चित ही होगा पता तुम्हें।

शुक्रवार, 2 मार्च 2018

सहस्राब्दि राज्य आ चुका है

क्या तुम लोगों ने देखा है कि इस समूह के लोगों में परमेश्वर कौन सा कार्य पूर्ण करेगा? परमेश्वर ने कहा, कि यहाँ तक कि सहस्राब्दि राज्य में भी लोगों को उसके कथनों का पालन अवश्य करना चाहिए, और भविष्य में परमेश्वर के कथन अंततोगत्वा मनुष्य के जीवन को कनान के उत्तम देश में सीधे तौर पर मार्गदर्शन करेगा।

रविवार, 25 फ़रवरी 2018

सभी के द्वारा अपना कार्य करने के बारे में

वर्तमान धारा में, हर एक व्यक्ति जो सच में परमेश्वर से प्रेम करता है उसके पास परमेश्वर द्वारा उसे पूर्ण किए जाने का अवसर होता है। भले ही वे युवा हों या वृद्ध, जब तक वे अपने हृदय में परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता और उसके लिए सम्मान रखते हैं, वे उसके द्वारा पूर्ण किए जाने के योग्य रहेंगे। परमेश्वर लोगों को उनके भिन्न भिन्न कार्यों के अनुसार पूर्ण करता है।

शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

कलीसिया जीवन और वास्तविक जीवन पर विचार-विमर्श

लोग महसूस करते हैं कि वे केवल अपने कलीसिया जीवन में ही परिवर्तित हो सकते हैं, और कि यदि वे कलीसिया के अंतर्गत अपने जीवन को नहीं जी रहे हैं, तो परिवर्तन संभव नहीं है, कि वे अपने वास्तविक जीवन में परिवर्तन को प्राप्त करने में असमर्थ हैं।

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2018

वास्तविकता को कैसे जानें

परमेश्वर वास्तविकता का परमेश्वर है: उसका समस्त कार्य वास्तविक है, सभी वचन जिन्हें वह कहता है वास्तविक हैं, और सभी सच्चाईयाँ जिन्हें वह व्यक्त करता है वास्तविक हैं। हर चीज़ जो उसके वचन नहीं हैं वे खोखले, अस्तित्वहीन, और अनुचित हैं।

शनिवार, 17 फ़रवरी 2018

एक सामान्य आत्मिक जीवन लोगों की सही मार्ग पर अगुवाई करता है

तुम लोग परमेश्वर के विश्वासी होने के मार्ग में बहुत ही थोड़ा चले हो, और तुम लोगों के लिए सही मार्ग पर प्रवेश करना अभी बाकी है, अतः तुम लोग परमेश्वर के स्तर को प्राप्त करने से अभी भी दूर हो।

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

धार्मिक सेवा समाप्त करो

संपूर्ण जगत में अपने कार्य की शुरूआत से ही, परमेश्वर ने अनेक लोगों को अपनी सेवा के लिए पूर्वनियत किया है, जिसमें हर व्यवसाय के लोग शामिल हैं।

रविवार, 11 फ़रवरी 2018

शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

परमेश्वर के कार्य के चरणों पर

बाहर से, ऐसा लगता है कि वर्तमान चरण में परमेश्वर के कार्य की कृतियां पहले ही समाप्त हो चुकी हैं, और मानव जाति पहले ही उसके वचनों का न्याय, ताड़ना, दंड, और शुद्धिकरण अनुभव कर चुकी है, और वे सेवा करने वालों की परीक्षा, ताड़ना के समय का शुद्धिकरण, मृत्यु की परीक्षा, विफलताओं की परीक्षा, और परमेश्वर के प्रेम के समय[क] जैसे चरणों से गुज़र चुके हैं।

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2018

विश्वासियों को क्या दृष्टिकोण रखना चाहिए

वो क्या है जो मनुष्य ने प्राप्त किया है जब उसने सर्वप्रथम परमेश्वर में विश्वास किया? तुमने परमेश्वर के बारे में क्या जाना है? परमेश्वर में अपने विश्वास के कारण तुम कितने बदले हो? अब तुम सभी जानते हो कि परमेश्वर में मनुष्य का विश्वास आत्मा की मुक्ति और देह के कल्याण के लिए ही नही है, और न ही यह उसके जीवन को परमेश्वर के प्रेम से सम्पन्न बनाने के लिए, इत्यादि है।

बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

छियालीसवें कथन की व्याख्या

इन सभी वचनों में, आज के वचनों की तुलना में कोई भी अधिक अविस्मरणीय नहीं है। परमेश्वर के वचनों ने पूर्व में मनुष्य की स्थितियों या स्वर्ग के रहस्यों को प्रकट किया था, फिर भी यह कथन अतीत के कथनों के असदृश है।

सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

छत्तीसवें कथन की व्याख्या

ऐसा कहा जाता है कि परमेश्वर ने अब मनुष्य को ताड़ना देना शुरू कर दिया है, लेकिन कोई भी यह निश्चित रूप से नहीं कह सकता, कोई भी एक स्पष्ट उत्तर नहीं दे सकता कि इस ताड़ना का मूल उद्देश्य मनुष्य को समझ आया है या नहीं।

रविवार, 4 फ़रवरी 2018

बत्तीसवें कथन की व्याख्या

परमेश्वर के वचनों से लोग सिर खुजलाने लग जाते हैं; ऐसा लगता है कि जब परमेश्वर बोलता है, तो वह मनुष्य को दूर कर रहा है और हवा से बात कर रहा है, जैसे कि वह मनुष्य के कर्मों पर अधिक ध्यान देने की बिल्कुल भी नहीं सोचता है, और मनुष्य के कद से पूरी तरह अनभिज्ञ है, जैसे कि जिन वचनों को वह कहता है वे लोगों की धारणाओं की ओर नहीं बल्कि मनुष्य को दूर करने की ओर निर्देशित किये गए हैं, जैसा कि परमेश्वर का मूल अभिप्राय था।

शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

इकतीसवें कथन की व्याख्या

परमेश्वर का स्वभाव परमेश्वर के सभी वचनों में समाया हुआ है, किन्तु उसके वचनों का मुख्य सूत्र समस्त मानव जाति के विद्रोह को प्रकट करना और उसकी अवज्ञा, अनधीनता, अनौचित्य, अधार्मिकता, और परमेश्वर को सचमुच प्यार करने में असमर्थता जैसी चीजों को उजागर करना है।

शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2018

तीसवें कथन की व्याख्या

कुछ लोगों को परमेश्वर के वचनों का थोड़ा सा परिज्ञान हो सकता है, किन्तु इनमें से किसी को भी अपनी भावनाओं पर भरोसा नहीं होता है; वे नकारात्मकता में पड़ने से बहुत डरते हैं।

46. "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का वास्तविक अर्थ

झांग जुन शेन्यांग शहर, लियाओनिंग प्रांत अतीत में, मैं मानता था कि "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का अर्थ परमेश्वर के साथ विश्व...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ओवरसीज हॉटलाइन