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गुरुवार, 20 जून 2019

46. "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का वास्तविक अर्थ

झांग जुन शेन्यांग शहर, लियाओनिंग प्रांत

अतीत में, मैं मानता था कि "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का अर्थ परमेश्वर के साथ विश्वासघात करना है, कलीसिया को छोड़ना, या अपने कर्तव्य से दूर भागना है। मैं सोचता था कि ये व्यवहार ही विद्रोह का निर्माण करते हैं। इसलिए, जब भी मैं लोगों को इस तरह के व्यवहार में शामिल हुआ सुनता था, तो मैं खुद को याद दिलाया करता कि मुझे इन लोगों की तरह परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, मैं अपने सभी प्रयासों में सतर्क रहता था और कलीसिया द्वारा मुझे सौंपे गए सभी कार्यों का पालन करता था।

शनिवार, 15 जून 2019

41. परमेश्वर का प्रेम की प्रकृति क्या है?

41. परमेश्वर का प्रेम की प्रकृति क्या है?

सिकियू, सुईहुआ सिटी, हीलॉन्ग जिआंग प्रदेश
जब भी मैं परमेश्वर के वचन का यह अवतरण पढ़ता हूं, “यदि तुम हमेशा मेरे प्रति बहुत निष्ठावान और प्यार करने वाले रहे हो, मगर तुम बीमारी, जीवन की बाधाओं, और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के परित्याग की पीड़ा को भुगतते हो और जीवन में किसी भी अन्य दुर्भाग्य को सहन करते हो, तो क्या तब भी मेरे लिए तुम्हारी निष्ठा और प्यार जारी रहेगा?” (“वचन देह में प्रकट होता है” से “एक बहुत गंभीर समस्या: विश्वासघात (2)” से) तो मुझे खास तौर पर दु:ख महसूस करता हूं — मेरे अंतर्मन में कष्ट की एक भावना फैलने

शुक्रवार, 14 जून 2019

40. ईमानदारी में बहुत ज्यादा खुशी है

40. ईमानदारी में बहुत ज्यादा खुशी है

गैन एन हेफेई शहर, अनहुई प्रांत
अपने जीवन में, मैं हमेशा से ही सामाजिक वार्तालापों में "व्यक्ति को दूसरों को नुकसान पहुँचाने वाला हृदय नहीं रखना चाहिए, लेकिन इतना सतर्क भी रहना चाहिए कि उसे नुकसान न पहुँचे" वाक्यांश के अनुसार चला हूँ। मैं बिना सोचे विचारे दूसरों पर कभी विश्वास नहीं करता हूँ। मुझे हमेशा यह महसूस हुआ है कि ऐसी परिस्थितियों में, जहाँ आप किसी के वास्तविक इरादों को नहीं जानते हों, वहाँ आपको बहुत जल्दी अपने पत्ते नहीं खोलने चाहिए। इसलिए, एक शांतिपूर्ण नज़रिया अपनाए रखना काफी है—इस तरह से तुम खुद की रक्षा करते हो और अपने सहयोगियों की दृष्टि में भी तुम एक "अच्छे व्यक्ति" बनोगे।

गुरुवार, 13 जून 2019

38. मेरे हृदय की गहराई में समाया हुआ रहस्य

38. मेरे हृदय की गहराई में समाया हुआ रहस्य

वुझी लिनयी शहर, शैंडॉन्ग प्रान्त
2006 की बसंत में, मुझसे मेरा अगुआ का पद छीन लिया गया था और मैं जहाँ से आई थी मुझे वापस वहाँ वापिस भेज दिया गया क्योंकि मुझे दूसरों का बहुत ज्यादा "चाटुकार" माना गया था। जब मैं पहली बार वापस गया, तो मैं संताप और वेदना की संकट की घड़ी में पड़ गया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि सालों तक की अगुआई के बाद, "चाटुकार" होने के कारण चीज़ें बिगड़ जाएँगी। मेरे लिए यह अंत था, मैं सोचता था, कि मेरे सभी परिचितों को मेरी असफलता के बारे में पता चल जाएगा और मैं कलीसिया में एक बुरा उदाहरण बनकर रह जाऊँगा। इन सबके बाद मैं दूसरों का सामना कैसे कर सकूँगा? इस बारे

बुधवार, 12 जून 2019

34. परमेश्वर में विश्वास करने के मार्ग पर बेहतरी के लिए एक मोड़

झुआनबिआन शंघाई शहर
यद्यपि मैं कई वर्षों से परमेश्वर का अनुसरण करता आ रहा था, फिर भी मैंने अपने जीवन में प्रवेश के साथ लगभग कोई प्रगति नहीं की थी, और इसने मुझे बहुत चिंतित महसूस करवा दिया था। खासकर जब मैंने जीवन प्रवेश के बारे में किसी उपदेश की एक रिकॉर्डिंग को सुना, और पवित्र आत्मा द्वारा द्वारा उपयोग किए गए व्यक्ति को उन भाइयों और बहनों से वार्ता करते हुए सुना जो उपदेश में उपस्थित थे और उसे सुन रहे थे, तो उसे इस तरह की बातें कहते हुए सुनकर मैं चिंतित महसूस करने लगा, "अब तुम लोग परमेश्वर में विश्वास करते हो

सोमवार, 3 जून 2019

32. परमेश्वर का हर वचन उसके स्वभाव की अभिव्यक्ति है

32. परमेश्वर का हर वचन उसके स्वभाव की अभिव्यक्ति है

हु के डेझोउ शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
जब भी मैं परमेश्वर द्वारा बोले गए इन वचनों को देखती, तो मुझे उत्कण्ठा महसूस होती थी: "हर एक वाक्य जो मैं ने कहा है वह परमेश्वर के स्वभाव को सिद्ध करता है। आप यदि मेरे वचनों पर सावधानी से मनन करोगे तो अच्छा होगा, और आप निश्चय उनसे बड़ा लाभ उठाएंगे।" मैं उत्कण्ठा महसूस करती थी क्योंकि मनुष्य की परमेश्वर के बारे में समझ और उनके उसे प्रेम और संतुष्ट करने कोशिश करने, दोनों के लिए परमेश्वर के स्वभाव को समझना बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते समय, मैं हमेशा

गुरुवार, 30 मई 2019

31. मैं मसीह को देखने के अयोग्य हूँ

31. मैं मसीह को देखने के अयोग्य हूँ

हुआनबाओ डैलिआन शहर, लिआओनिंग प्रांत
जब से मैंने सबसे पहले सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करना आरंभ किया, तब से मैं उन भाइयों और बहनों की हमेशा सराहना करता था जो मसीह की व्यक्तिगत सेवकाई हासिल कर सकते हैं, जो अपने स्वयं के कानों से उसके धर्मोपदेशों को सुन सकते हैं। अपने दिल में, मैं सोचता कि अगर भविष्य में एक दिन मैं मसीह के धर्मोपदेशों को सुन सकूँ तो यह कितना अद्भुत होगा, निस्संदेह उसे देखना तो और भी अधिक अद्भुत होगा। लेकिन बाद में, उसकी संगति को सुनकर, मुझे मेरे दिल की गहराई से यह महसूस होने लगा है कि मैं मसीह को देखने के योग्य नहीं हूँ।

बुधवार, 29 मई 2019

30. बदली किये जाने पर भावना

30. बदली किये जाने पर भावना

यी रेन लेईव्यू शहर, शानडोंग प्रांत
कुछ समय पहले, जब कलीसिया ने एक नेता को बदल दिया, एक अवधारणा मेरे भीतर उठ खड़ी हुई, कलीसिया का कर्मियों के संशोधन का सिद्धांत मेरी समझ में नहीं आयाI मैं जो देख सकती थी, जो बहन बदली गई थी वह सच्चाई प्राप्त करने और सहभागिता करने में बहुत अच्छी थी, और भ्रष्टाचार के बारे में खुलकर अपने खुद के विचार रख सकती थीI इसलिए मैं कभी नहीं जान पाई कि जिसने सच्चाई के लिए इतना प्रयास किया उसे कैसे

मंगलवार, 28 मई 2019

28. सही मायने में एक अच्छे व्यक्ति का मानदंड

28. सही मायने में एक अच्छे व्यक्ति का मानदंड

मोरान लीन्यी शहर, शानडोंग प्रांत
जब से मैं एक बच्ची थी, मैंने हमेशा, दूसरे लोग मुझे कैसे देखते हैं और उनका मेरे लिए मूल्यांकन क्या है, इस बात को बहुत महत्व दिया। ताकि मैंने जो कुछ भी किया उसके लिए दूसरों से प्रशंसा प्राप्त कर सकूँ, जब भी कोई बात उठी, मैंने तब भी किसी से कोई तर्क नहीं किया, ताकि मेरी अच्छी छवि जो लोगों में मेरे लिए थी वह बनी रहे। अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करने के बाद, मैंने इसी तरीके से काम किया, जैसी अच्छी

सोमवार, 27 मई 2019

27. झूठ के पीछे क्या है

27. झूठ के पीछे क्या है

ज़ियाओजिंग हेज़ शहर, शानडोंग प्रांत
हर बार जब मैंने परमेश्वर के वचनों को हमें ईमानदार बनने और सही ढंग से बोलने के लिए कहते हुए देखा, मैंने सोचा, "मुझे सही ढंग से बोलने में कोई समस्या नहीं है। क्या यह सिर्फ सच को सच बोलना तथा चीजों को वैसे ही बताना नहीं है, जैसे कि वे हैं? क्या यह उतना आसान नहीं है? इस संसार में मुझे जिस बात ने सबसे ज्यादा चिढ़ाया है, वह है लोगों का सुशोभित तरीके से बोलना।" इस वजह से, मैंने अत्यधिक विश्वास को महसूस किया, यह सोचकर कि इस सम्बन्ध में मुझे कोई समस्या नहीं है। लेकिन केवल परमेश्वर के प्रकाशन के माध्यम से मुझे पता चला कि, सत्य में प्रवेश किये बिना या किसी के स्वभाव को बदले बिना, कोई भी किसी भी तरह से सही तरीके से नहीं बोल सकता।

रविवार, 26 मई 2019

26. पवित्रा आत्मा सैद्धांतिक तरीके में काम करता है

26. पवित्रा आत्मा सैद्धांतिक तरीके में काम करता है

किन शुटिंग लिनयी शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
कुछ समय से, यद्यपि मैंने परमेश्वर के वचनों को खाना और पीना बंद नहीं किया था, मैं कभी भी प्रकाश को महसूस नहीं करती थी। मैं ने इसके लिए परमेश्वर से प्रार्थना की थी लेकिन, उसके बाद भी, मुझे प्रबुद्ध नहीं किया गया था। इसलिए मैं सोचती थी कि, "मुझे जो खाना और पीना चाहिए था मैंने उसे खाया और पिया है और परमेश्वर मुझे प्रबुद्ध नहीं कर रहा है। ऐसा कुछ नहीं हैं जो मैं कर सकती हूँ, और मेरे पास परमेश्वर के वचन हासिल करने की योग्यता नहीं है। परमेश्वर द्वारा हर मनुष्य को प्रबुद्ध करने का समय एक होता है, इसलिए इसके लिए शीघ्रता करने की कोशिश करने का कोई उपयोग नहीं है।" इसके बाद, मैं "धैर्यपूर्वक" परमेश्वर की प्रबुद्धता का इंतजार करते हुए, नियम का पालन करती थी और किसी चिंता के बिना परमेश्वर के वचनों के वचनों को खाती और पीती थी।

गुरुवार, 23 मई 2019

25. सेवा में समन्वय का महत्व

25. सेवा में समन्वय का महत्व

मेई जी जिनान शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
कलीसिया के प्रशासन को उसके मूल रूप में बदलने के बाद, परमेश्वर के घर में अगुआ के हर स्तर के लिए साझेदारी स्थापित की गई थी। उस समय, मैं सोचती थी कि यह अच्छी व्यवस्था है। मेरी क्षमता कम थी और मेरे पास काफी काम था; मुझे वाकई एक साझेदार की ज]रूरत थी जो मेरे क्षेत्र में सभी तरह के कार्य पूरा करने में मेरी मदद करे।

बुधवार, 22 मई 2019

23. बचाय जाने के बारे में समझ

23. बचाय जाने के बारे में समझ

लिंग क्वींग ग्विंग्ज़्हौ नगर, षंडोंग प्रांत
इन अनेक वर्षों में परमेश्वर का अनुसरण करते हुए, मैंने अपने परिवार और देह के आनंदों को त्याग दिया है, और मैं पूरा दिन कलीसिया में अपना कार्य करने में व्यस्त रही हूँ। इसलिए मैं मानती हूँ: जब तक मैं कलीसिया में मुझे सौंपे गए काम को छोड़ती नहीं हूँ, परमेश्वर को धोखा नहीं देती हूँ, कलीसिया को छोड़ती नहीं हूँ, और अंत तक परमेश्वर का अनुसरण करती हूँ, परमेश्वर मुझे क्षमा करेगा और मैं परमेश्वर द्वारा बचाई जाती रहूंगी। मैं यह भी मानती थी कि मैं परमेश्वर द्वारा मुक्ति के मार्ग पर चल रही हूँ, और मुझे बस इतना करना है कि मुझे अंत तक उसका अनुसरण करना है।

मंगलवार, 21 मई 2019

22. परमेश्वर के वचनों ने मुझे जगा दिया है

22. परमेश्वर के वचनों ने मुझे जगा दिया है

मियाओ ज़ियाओ ज़िनान शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
अतीत में, मैं हमेशा सोचा करती थी जब परमेश्वर ने कहा था कि "एक कठपुतली और ग़द्दार हो जो महान श्वेत सिंहासन से दूर भाग रहा है" तो वह उन लोगों का उल्लेख कर रहा था जो कार्य के इस चरण को स्वीकार करते हें लेकिन अंत में पीछे हट जाते हैं क्योंकि वे उसकी ताड़ना और न्याय सहने के अनिच्छुक होते हैं। इसलिए, जब भी मैं भाइयों और बहनों को किसी भी कारण से इस मार्ग से पीछे हटते हुए देखती थी, तो मेरा दिल उनके प्रति तिरस्कार से भर जाया करता था: बड़े सफेद सिंहासन से एक और कठपुतली और कपटी भाग गया जो परमेश्वर का दंड प्राप्त करेगा। इसी के साथ, मुझे यह लगता था कि मैं परमेश्वर के न्याय को स्वीकार में उचित रूप से व्यवहार कर रही हूँ और परमेश्वर का उद्धार पाने से बहुत दूर नहीं हूँ।

सोमवार, 20 मई 2019

17. अहंकार का कड़वा फल

17. अहंकार का कड़वा फल

हू किंग सुज़ोउ शहह, अन्हुई प्रांत
जब मैंने परमेश्वर के वचनों को यह कहते हुए देखा: "आपमें से वे लोग जो मार्गदर्शक के रूप में सेवा करते हैं, वे हमेशा अधिक चतुरता प्राप्त करना चाहते हैं, बाकी सब से श्रेष्ठ बनना चाहते हैं, नई तरकीबें पाना चाहते हैं ताकि परमेश्वर देख सकें कि आप लोग वास्तव में कितने महान मार्गदर्शक हैं। … आप लोग हमेशा दिखावा करना चाहते हैं; क्या यह निश्चित रूप से एक अहंकारी प्रकृति का प्रकटन नहीं है?" ("मसीह की बातचीतों के अभिलेख" से "सत्य के बिना परमेश्वर को अपमानित करना आसान है" से)। तो मैंने खुद से सोचा: चतुर नई चालें ढूँढने की कोशिश करने का ऐसा उत्साह किसके पास है? कौन नहीं जानता है कि परमेश्वर का स्वभाव मनुष्य के अपमान को बर्दाश्त नहीं करता है? मैं निश्चित

रविवार, 19 मई 2019

16. बेड़ियों को तोड़ना

झेंग्ज़ी झेंगझोउ शहर, हेनान प्रांत
दस साल पहले, अपनी अहंकारी प्रकृति के कारण, मैं कभी भी कलीसिया की व्यवस्थाओं का पूरी तरह से पालन करने में सक्षम नहीं थी। अगर मुझे उपयुक्त लगा तो मैं उसका पालन करती थी, लेकिन अगर मुझे नहीं लगा तो मैं चुना करती थी कि उसका पालन करना है या नहीं। इसके परिणामस्वरूप अपने कर्तव्य को पूरा करने के दौरान कार्य की व्यवस्थाओं का गंभीरता से उल्लंघन होता था। मैं अपने खुद के काम करती थी और परमेश्वर के स्वभाव का अपमान करती थी, और बाद में मुझे घर भेज दिया गया था। अनेक वर्षों तक

शनिवार, 18 मई 2019

13. कठिनाइयों के बीच परमेश्वर की इच्छा को समझना

ज़ियाओ रुई पैंज़िहुआ सिटी, सिचुआन प्रांत
जब मैं सुसमाचार का प्रचार कर रहा था, तो मेरा सामना विधर्मी अगुआओं से हुआ जो प्रतिरोध और गड़बड़ी करने के लिए झूठी गवाही देते थे, और पुलिस बुला लेते थे। इस वजह से जिन लोगों को मैं उपदेश दे रहा था वे हमारे संपर्क में आने की हिम्मत नहीं कर रहे थे, और जिन्होंने अभी-अभी सुसमाचार को स्वीकार किया था, वे परमेश्वर के कार्य में विश्वास करने में असमर्थ हो रहे थे। जब मैं बहुत मेहनत करता और फिर भी परिणाम बहुत ख़राब होते थे, तो मैंने सोचता था कि: इंजील के कार्य को संप न्न करना बहुत कठिन है। कितना अद्भुत होता

बुधवार, 15 मई 2019

10. परमेश्वर की सेवा करते समय नई चालाकियाँ मत ढूँढो

हेयी झुआंघे सिटी, लिआओनिंग प्रांत
मुझे अभी-अभी कलीसिया के अगुआ का उत्तरदायित्व लेने के लिए पदोन्नत किया गया था। लेकिन कुछ अवधि तक की कठिन मेहनत के बाद, न केवल कलीसिया का इंजील का कार्य फीका पड़ गया था, बल्कि इंजील दल में मौजूद मेरे सभी भाई-बहन भी नकारात्मकता और कमज़ोरी में जी रहे थे। इस परिस्थिति का सामना करके, मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं रख सकी। मैं पृथ्वी पर इंजील के कार्य में नए प्राण भरने के लिए कैसे कार्य कर सकती थी? अपने दिमाग पर जोर डालने के बाद, अंतत: मेरे विचार में एक अच्छा

मंगलवार, 14 मई 2019

9. मैं परमेश्वर को जानने का मार्ग देखता हूँ

शिआओकाओ चांग्ज़ी सिटी, शांक्ज़ी प्रदेश
एक दिन, मैंने एक निबंध में परमेश्वर के वचन का निम्न अवतरण पढ़ा "पतरस ने यीशु को कैसे जाना": "यीशु का अनुसरण करने के दौरान, पतरस ने उसके जीवन के बारे में हर चीज़ का अवलोकन किया और उसे हृदय से लगाया: उसके कार्यों को, वचनों को, गतिविधियों को, और अभिव्यक्तियों को। … यीशु के साथ सम्पर्क में उसके समय से, पतरस ने यह भी महसूस किया कि उसका चरित्र किसी भी साधारण मनुष्य से भिन्न था। उसने हमेशा स्थिरता से कार्य किया, और कभी भी जल्दबाजी नहीं की, किसी भी विषय

सोमवार, 13 मई 2019

8. यह जानना कि मैं फरीसियों के मार्ग पर चलती आई हूँ

वुज़िन ताइयुआन सिटी, शांग्ज़ी प्रांत
कोई चीज़ जिसके बारे में हमने पिछले संवादों में हमेशा चर्चा की है, वह है पतरस और पौलुस द्वारा चले गए मार्ग। यह कहा जाता है कि पतरस ने स्वयं को और परमेश्वर को जानने पर ध्यान दिया था, और ऐसा व्यक्ति था जो परमेश्वर द्वारा अनुमोदित था, जबकि पौलुस ने केवल अपने कार्य, प्रतिष्ठा और हैसियत पर ध्यान दिया था, और ऐसा व्यक्ति था जो परमेश्वर द्वारा तिरस्कृत था। मैं पौलुस के मार्ग पर चलने से हमेशा डरते रही हूँ, इसी वजह से मैं आमतौर पर प्रायः पतरस के अनुभवों के बारे में परमेश्वर के वचनों को पढ़ती हूँ, ताकि

46. "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का वास्तविक अर्थ

झांग जुन शेन्यांग शहर, लियाओनिंग प्रांत अतीत में, मैं मानता था कि "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का अर्थ परमेश्वर के साथ विश्व...

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