- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- परमेश्वर के गवाहों के लिए स्वभाव में बदलाव आवश्यक है
- I
- परमेश्वर के विविध कार्यों से आता है,
- इन्सान के स्वभाव में बदलाव।
- इन बदलावों के बिना, मुमकिन नहीं इन्सान का परमेश्वर के हृदयानुसार बनना,
- और उसकी गवाही देना।
- इन्सान के स्वभाव में बदलाव दर्शाता है,
- शैतान और अँधेरे से वो मुक्त हुआ है।
- वो है सच में परमेश्वर के कार्य का नमूना।
- है मुताबिक परमेश्वर के दिल के और है गवाह उसका।
- II
- आज देहधारी परमेश्वर जहान में आया है,
- वो अपना कार्य करने आया है।
- अपेक्षा है उसकी कि इन्सान उसे जाने,
- उसकी गवाही दे और आज्ञा माने।
- उसके सामान्य व्यवहारिक कार्य को जाने
- इन्सान की धारणाओं के उलट हों तो भी, उसके कार्य और वचनों को माने
- इन्सान को बचाने के कार्य की, उन्हें जीतने वास्ते
- जो कर्म किये उसने उनकी, गवाही दे, गवाही दे।
- जो देते हैं गवाही परमेश्वर की
- उनके पास होना चाहिए परमेश्वर का ज्ञान।
- बस यही है सच्ची गवाही,
- शैतान को शर्मिंदा कर पाए यही।
- कांट-छांट और निपटारे द्वारा,
- परमेश्वर के न्याय से गुजरने के द्वारा,
- जो जान जाते हैं परमेश्वर को,
- उन्हें इस्तेमाल करता है वो, अपनी गवाही देने को।
- जिन्हें भ्रष्ट किया गया है,
- जिन्होंने स्वभाव बदला है,
- और ऐसे पाया है उसकी आशीष को
- उन्हें इस्तेमाल करता है वो, अपनी गवाही देने को।
- III
- उसे नहीं चाहिए कि इन्सान करे केवल मुख से स्तुति,
- जिन्हें परमेश्वर ने बचाया नहीं है,
- ऐसे शैतान के समान लोगों की स्तुति और गवाही नहीं चाहिए।
- केवल वे जो जानते हैं परमेश्वर को
- सच में दे सकते हैं गवाही उसकी;
- और जिनके स्वभाव बदल गये हैं,
- इसके काबिल हैं वही, हैं वही, हैं वही।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया
- सर्वशक्तिमान परमेश्वर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें