- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- परमेश्वर है मनुष्य का अनंत सहारा
- I
- फिर जी उठा यीशु मगर,
- था इन्सान के साथ उसका काम और दिल।
- अपने प्रकटन के ज़रिये उसने इन्सान को बताया
- रूप चाहे हो जो भी, पर रहेगा वो उनके साथ ही।
- वो चलेगा उनके साथ,
- रहेगा साथ वो हर जगह, हर समय,
- करेगा आपूर्ति और चरवाही, देगा उन्हें खुद को देखने और छूने,
- ताकि न हों असहाय वे फिर कभी, वे फिर कभी।
- अपने पुनरुत्थान के बाद यीशु ने दिखाई
- इन्सान के लिए परमेश्वर की आशा और चिंता,
- और दिखाया कि परमेश्वर करता इन्सान की परवाह और उसे है संजोता।
- यह तो है पहले जैसा, और कभी नहीं है बदला।
- II
- यीशु चाहता था कि लोग जानें
- कि नहीं हैं वे इस दुनिया में अकेले।
- उनकी परवाह करता परमेश्वर, है वो उनके साथ में,
- उस पर वे सदा आसरा रख सकते हैं।
- अपने हर अनुयायी का वो परिवार है।
- परमेश्वर के आसरे, इन्सान न कमज़ोर, न अकेला है।
- जो उसे पाप-बलि के रूप में स्वीकार करते हैं।
- वो पाप के बंधन में और न रहेंगे।
- III
- जी उठने के बाद इन्सान के वास्ते,
- यीशु के काम देखने में लगते थे छोटे।
- लेकिन परमेश्वर के लिए उनके अर्थ थे बड़े,
- उनके मूल्य और महत्व भी थे बड़े।
- परमेश्वर जो करता है आरम्भ, उसे खत्म भी वही करता है।
- भिन्न चरण और योजनायें, दिखाते हैं उसकी बुद्धि,
- वो दिखाते हैं उसके महान कर्म और सर्वसामर्थता उसकी,
- और दिखाते हैं उसका प्रेम और दया भी।
- IV
- परमेश्वर के काम में सबसे मुख्य है
- कि वो इन्सान की बहुत परवाह करता है,
- और उसके लिए सच में है वो चिंता से भरा।
- ये हैं भावनाएं ऐसी जिन्हें वो अनदेखा नहीं कर सकता, कर सकता।
- अपने पुनरुत्थान के बाद यीशु ने दिखाई
- इन्सान के लिए परमेश्वर की आशा और चिंता,
- और दिखाया कि परमेश्वर करता इन्सान की परवाह और उसे है संजोता।
- यह तो है पहले जैसा, और कभी नहीं है बदला,
- नहीं है बदला, नहीं है बदला, नहीं है बदला।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- सम्पर्क करें:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया - सर्वशक्तिमान परमेश्वर
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