रविवार, 14 अप्रैल 2019

परमेश्वर के वचनों का एक भजन इंसान को संभालने का काम है शैतान को हराने का काम



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • इंसान को संभालने का काम है शैतान को हराने का काम 

  • I
  • न्याय हो या ताड़ना, परमेश्वर के तमाम कामों का शैतान ही निशाना है,
  • इनका मकसद इंसान को बचाना और शैतान को हराना है।
  • एक ही लक्ष्य है परमेश्वर के काम का: अंत तक शैतान से लड़ना है।
  • विजयी होने तक परमेश्वर आराम न करेगा।
  • क्योंकि परमेश्वर के काम का निशाना है शैतान,
  • चूँकि शैतान के कब्ज़े में है भ्रष्ट हुए इंसान,
  • गर जंग शुरू न की परमेश्वर ने शैतान के ख़िलाफ़,
  • या अलग न किया इंसान को शैतान से, तो कभी पाया न जा सकेगा उसे।
  • गर कब्ज़े में रहा इंसान शैतान के, और पाया न जा सका उसे,
  • तो अजेय साबित होगा शैतान, हराया नहीं गया है उसे।
  • बड़े लाल अजगर के ख़िलाफ़ जंग मूल है
  • परमेश्वर के छ: हज़ार साल के काम का,
  • इंसान के प्रबंधन का काम भी
  • शैतान को हराने का काम है।
  • II
  • नए आयाम में लाने के लिये इंसान को,
  • छ: हज़ार साल जंग की है, काम किया है परमेश्वर ने,
  • शैतान जब हार जाएगा, इंसान आज़ाद हो जाएगा।
  • हर चरण इंसान की असली ज़रूरतों, अपेक्षाओं के अनुरूप है,
  • ताकि हरा सके शैतान को परमेश्वर।
  • गर कब्ज़े में रहा इंसान शैतान के, और पाया न जा सका उसे,
  • तो अजेय साबित होगा शैतान, हराया नहीं गया है उसे।
  • बड़े लाल अजगर के ख़िलाफ़ जंग मूल है
  • परमेश्वर के छ: हज़ार साल के काम का,
  • इंसान के प्रबंधन का काम भी
  • शैतान को हराने का काम है।
  • III
  • छ: हज़ार साल की प्रबंधन योजना में,
  • पहले चरण में व्यवस्था का काम किया परमेश्वर ने।
  • दूसरे चरण में अनुग्रह के युग का काम किया परमेश्वर ने।
  • तीसरे चरण में इंसान को जीतता है परमेश्वर।
  • उस हद अनुसार काम किया जाता है
  • जिस तक भ्रष्ट कर दिया है इंसान को शैतान ने।
  • इस काम का लक्ष्य शैतान को हराना है,
  • इन तीनों चरणों का मकसद शैतान को हराना है।
  • बड़े लाल अजगर के ख़िलाफ़ जंग मूल है
  • परमेश्वर के छ: हज़ार साल के काम का,
  • इंसान के प्रबंधन का काम भी
  • शैतान को हराने का काम है।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
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