- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- इंसान को संभालने का काम है शैतान को हराने का काम
- I
- न्याय हो या ताड़ना, परमेश्वर के तमाम कामों का शैतान ही निशाना है,
- इनका मकसद इंसान को बचाना और शैतान को हराना है।
- एक ही लक्ष्य है परमेश्वर के काम का: अंत तक शैतान से लड़ना है।
- विजयी होने तक परमेश्वर आराम न करेगा।
- क्योंकि परमेश्वर के काम का निशाना है शैतान,
- चूँकि शैतान के कब्ज़े में है भ्रष्ट हुए इंसान,
- गर जंग शुरू न की परमेश्वर ने शैतान के ख़िलाफ़,
- या अलग न किया इंसान को शैतान से, तो कभी पाया न जा सकेगा उसे।
- गर कब्ज़े में रहा इंसान शैतान के, और पाया न जा सका उसे,
- तो अजेय साबित होगा शैतान, हराया नहीं गया है उसे।
- बड़े लाल अजगर के ख़िलाफ़ जंग मूल है
- परमेश्वर के छ: हज़ार साल के काम का,
- इंसान के प्रबंधन का काम भी
- शैतान को हराने का काम है।
- II
- नए आयाम में लाने के लिये इंसान को,
- छ: हज़ार साल जंग की है, काम किया है परमेश्वर ने,
- शैतान जब हार जाएगा, इंसान आज़ाद हो जाएगा।
- हर चरण इंसान की असली ज़रूरतों, अपेक्षाओं के अनुरूप है,
- ताकि हरा सके शैतान को परमेश्वर।
- गर कब्ज़े में रहा इंसान शैतान के, और पाया न जा सका उसे,
- तो अजेय साबित होगा शैतान, हराया नहीं गया है उसे।
- बड़े लाल अजगर के ख़िलाफ़ जंग मूल है
- परमेश्वर के छ: हज़ार साल के काम का,
- इंसान के प्रबंधन का काम भी
- शैतान को हराने का काम है।
- III
- छ: हज़ार साल की प्रबंधन योजना में,
- पहले चरण में व्यवस्था का काम किया परमेश्वर ने।
- दूसरे चरण में अनुग्रह के युग का काम किया परमेश्वर ने।
- तीसरे चरण में इंसान को जीतता है परमेश्वर।
- उस हद अनुसार काम किया जाता है
- जिस तक भ्रष्ट कर दिया है इंसान को शैतान ने।
- इस काम का लक्ष्य शैतान को हराना है,
- इन तीनों चरणों का मकसद शैतान को हराना है।
- बड़े लाल अजगर के ख़िलाफ़ जंग मूल है
- परमेश्वर के छ: हज़ार साल के काम का,
- इंसान के प्रबंधन का काम भी
- शैतान को हराने का काम है।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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- सर्वशक्तिमान परमेश्वर
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