- कलीसिया का भजन
- धरती पर सच्चा प्यार पाना क्यों है इतना मुश्किल
- I
- कब से है मुझे तुम्हें देखने की लालसा, परमेश्वर।
- मैं रहना नहीं चाहता अब तुमसे दूर।
- तुम हो मेरे संप्रभु सृष्टिकर्ता,
- लेकिन अब रह सकते हैं हम हमेशा एक साथ नहीं।
- दूषित इंसान को बचाने के लिए सहते हो अत्यंत शर्मिंदगी तुम।
- कौन समझ सकता है?
- ख़ून और आंसुओं की सड़क पर सफ़र किया है तुमने,
- कई महीनों और सालों से सही है तकलीफ़।
- अपना पूरा प्यार लाए हो नीचे हमारे लिए तुम।
- लोगों की मुश्किलों को साझा करते हो तुम,
- फिर भी एकांत और त्याग सहन करते हो तुम।
- कौन कर सकता है ख़्याल तुम्हारे दिल का?
- हर पुकार, उम्मीद का हर दिन।
- इंसान का प्यार हासिल करने के लिए अपना सब कुछ देते हो तुम।
- फिर भी कोई नहीं दे पाता सच में दिलासा तुम्हें।
- धरती पर सच्चा प्यार पाना क्यों है इतना मुश्किल?
- II
- झुकती हूँ तुम्हारे सामने मैं, दुख से भरी हुई
- मलाल करते हुए, क्षमा याचना करती हुई।
- जो किया है मैंने उस पर है मुझे अफ़सोस।
- मुझे नफ़रत है कि मैंने परवाह नहीं की तुम्हारे दिल की।
- मेरे सभी दूषण निराश करते हैं तुम्हें।
- कैसे मैं अपनी गलतियों का पश्चात्ताप करूं?
- III
- तुम्हारी व्यक्त की गई सच्चाई बचाती है इंसान को,
- दुनिया के लिए छोड़ती है धधकता प्यार।
- तुमने जो मुझे सौंपा है
- मेरे दिल में समाया हुआ है गहराई से।
- मुझे चाहिए कुछ और नहीं,
- बस हमेशा तुम्हारा वफ़ादार रहना है मुझे।
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया
- सर्वशक्तिमान परमेश्वर
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें