- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- इंसान और परमेश्वर हैं सहभागी आनंद-मिलन में
- I
- ब्रह्माण्ड में अपना काम शुरु कर चुका है परमेश्वर।
- जागृत हैं लोग और घूमते हैं उसके काम के चहुं ओर।
- जब उनके भीतर “सफर” करता है परमेश्वर,
- छूटते हैं शैतान के बंधन से वो,
- आज़ाद हैं अब सदा के लिये, महा-व्यथा के बंधन से वो।
- लोगों में उल्लास है, परमेश्वर के दिन के आने से।
- ग़म सारा मिट गया, सदा के लिये उनके दिलों से।
- ग़म के बादल छँट गए हैं, बहती है ताज़ी हवा।
- इंसान की निकटता की ख़ुशी से आनंदित है परमेश्वर।
- II
- हर चीज़ को रहता इंतज़ार, परमेश्वर के बोले वचनों का।
- सबका मन हर्षित होता है, परमेश्वर जो कहता-करता है।
- है सबसे ऊँचा वो फिर भी, इंसानों के संग रहता है।
- कर्म उनके ज़ाहिर करते, कि धरती-आकाश सृजन परमेश्वर के।
- हर चीज़ में उसका हो उत्कर्ष, जब सारे जन गुणगान करें।
- आसमाँ नीला हो जाए, फूल खिलें, हरियाली बढ़ जाए।
- धरती पर हर चीज़ बड़ी सुंदर हो जाए, हो जाए।
- III
- सुनकर उसकी वाणी को, लोग इधर-उधर हो जाएं।
- उसके राज्य में लोग, भर जाते हैं ख़ुशियों से;
- और फलने-फूलने लगती है ज़िंदगी उनकी।
- जो चुने हुए लोग हैं परमेश्वर के, वो काम उनमें करता है,
- अपने कामों पर परमेश्वर,
- इन्सान की धारणा के, दाग़ नहीं लगने देता।
- क्योंकि परमेश्वर अपने काम ख़ुद ही करता है।
- जब काम वो ख़ुद ही करता है,
- हर चीज़ नई हो जाती है, हर चीज़ का रूप बदलता है।
- जब काम ख़त्म हो जाता है परमेश्वर का,
- इंसान नया हो जाता है, परमेश्वर की मांगों से,
- उसे होती नहीं फिर कोई व्यथा।
- ख़ुशियों की आशीषों से, संसार धन्य हो जाता है।
- हर चीज़ में उसका हो उत्कर्ष, जब सारे जन गुणगान करें।
- आसमाँ नीला हो जाए, फूल खिलें, हरियाली बढ़ जाए।
- धरती पर हर चीज़ बड़ी सुंदर हो जाए, हो जाए।
- जब ख़ुशियों की आशीषों से, संसार धन्य हो जाएगा,
- तो मानवता को परमेश्वर का, आशीर्वाद मिल जाएगा,
- मिल जाएगा, मिल जाएगा, मिल जाएगा।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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- सर्वशक्तिमान परमेश्वर

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