- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- परमेश्वर बचाता है उन्हें जो उसकी आराधना करते और बुराई से दूर रहते हैं
- I
- नूह के समय में, इंसान भटक गया था,
- बेहद भ्रष्ट होकर, परमेश्वर की आशीष से वंचित हो गया था,
- परमेश्वर की देखभाल से वंचित, उसकी प्रतिज्ञाओं को खो चुका था।
- परमेश्वर की रोशनी के बग़ैर, अंधकार में जी रहा था,
- वो प्रकृति से दुराचारी हो गया था,
- वो घिनौनी भ्रष्टता के वशीभूत हो गया था।
- सिर्फ़ नूह बुराई से दूर रहा और परमेश्वर की आराधना की,
- इसलिये परमेश्वर की वाणी को वो सुन पाया,
- परमेश्वर के निर्देशों को सुन पाया,
- परमेश्वर के हुक्म के मुताबिक़ नाव बना पाया।
- हर तरह के, हर क़िस्म, ढंग और विशेषता के
- जीवित प्राणियों को उसने इकट्ठा किया।
- हो गई जब हर तैयारी पूरी,
- तो परमेश्वर ने शुरू की अपनी विनाशलीला, अपनी विनाशलीला।
- II
- इंसान इतना गिर गया था,
- वो फिर परमेश्वर की नेक प्रतिज्ञाओं को ग्रहण नहीं कर पाया।
- वो परमेश्वर का चेहरा देखने के बिल्कुल काबिल न था,
- न ही उसकी वाणी सुनने के काबिल था।
- क्योंकि त्याग दिया था उसने परमेश्वर को,
- दर-किनार कर दिया था उसने जो दिया था।
- छोड़ दिया था, और भुला दिया था उसने परमेश्वर की सारी सीख को।
- III
- इतनी ज़्यादा थी इंसान की भटकन और उसका दुराचार।
- खो दी थी उसने अपनी सारी तर्क-बुद्धि और इंसानियत।
- इतनी व्यापक और अधम थी दुष्टता उसकी,
- लगातार वो मौत के क़रीब आता गया।
- दूर होता गया वो परमेश्वर के मार्ग से,
- इस तरह वो परमेश्वर की सज़ा और कोप का भागी बना।
- सिर्फ़ नूह बुराई से दूर रहा और परमेश्वर की आराधना की,
- इसलिये परमेश्वर की वाणी को वो सुन पाया,
- परमेश्वर के निर्देशों को सुन पाया,
- परमेश्वर के हुक्म के मुताबिक़ नाव बना पाया।
- हर तरह के, हर क़िस्म, ढंग और विशेषता के
- जीवित प्राणियों को उसने इकट्ठा किया।
- हो गई जब हर तैयारी पूरी,
- तो परमेश्वर ने शुरू की अपनी विनाशलीला, अपनी विनाशलीला।
- IV
- सिर्फ़ नूह और उसका कुटुम्ब ज़िंदा बचा,
- सिर्फ़ नूह और उसके कुटुम्ब के सात लोग ज़िंदा बचे।
- क्योंकि सिर्फ़ नूह बुराई से दूर रहा और यहोवा की आराधना की,
- और यहोवा की आराधना की।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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