मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

परमेश्वर के वचनों का एक भजन जो कुछ भी लोग कहते और करते हैं, वह बच नहीं सकता परमेश्वर की नज़र से



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • जो कुछ भी लोग कहते और करते हैं, वह बच नहीं सकता परमेश्वर की नज़र से

  • I
  • आस्था बहुत सुंदर है तुम लोगों की, तुम कहते हो,
  • अपना जीवन समर्पित करना कामना है तुम्हारी परमेश्वर के कार्य के लिये,
  • और जो कुछ तुम कर सकते हो करना चाहोगे उसके लिये।
  • लेकिन बदला नहीं है ज़्यादा स्वभाव तुम्हारा।
  • अहंकार के शब्द हैं जो बोले हैं तुमने,
  • मगर असलियत में जो करते हो तुम वो दयनीय है।
  • जैसे ज़बान और होंठ स्वर्ग में हों तुम्हारे,
  • लेकिन पाँव बहुत दूर धरती पर हैं तुम्हारे।
  • इस तरह शब्द, शोहरत और कर्म भयावह स्थिति में हैं तुम्हारे।
  • क्या लगता है तुम्हें, पा सकते हो अधिकार
  • प्रवेश करने का परमेश्वर के कार्य और वचनों की पावन धरती पर
  • उसके द्वारा बिना तुम्हारे तमाम शब्दों और कर्मों की परीक्षा के?
  • क्या दे सकता है धोखा कोई उसकी आँखों को?
  • कैसे बच सकते हैं नीच कर्म और तुच्छ बातें तुम्हारी उसकी नज़रों से?
  • II
  • खंडित हो चुकी है ख्याति तुम्हारी,
  • गिरता जा रहा है व्यवहार तुम्हारा, तुच्छ हैं शब्द तुम्हारे,
  • घिनौना है जीवन तुम्हारा, अधम है मानवता तुम्हारी।
  • बहुत तंग-ख़्याल हो इंसानों के प्रति तुम,
  • मोल-भाव करते हो हर छोटी बात तुम।
  • तकरार करते हो हैसियत और प्रतिष्ठा जैसी बातों पर तुम,
  • इस हद तक कि नरक के रास्ते पर जाने को तैयार हो तुम,
  • आग के दरिया में भी कूद जाओगे तुम।
  • मौजूदा शब्द और कर्म तुम्हारे काफ़ी हैं
  • परमेश्वर के लिये ये बताने को कि पापी हो तुम।
  • III
  • परमेश्वर के काम के प्रति रवैया तुम्हारा पर्याप्त है
  • उसे यह तय करने देने के लिये कि अधार्मिक हो तुम लोग।
  • तमाम स्वभाव तुम्हारे काफ़ी हैं ये बताने के लिये,
  • घृणित चीज़ों से भरे, मलिन आत्मा हो तुम लोग।
  • जो कुछ तुम लोग करते हो, प्रकट करते हो, एक मायने हो सकते हैं उसके:
  • पिया है भरपूर रक्त मैली आत्माओं का तुम लोगों ने।
  • ज़िक्र आता है जब स्वर्ग-राज्य में प्रवेश का,
  • तो प्रयास करते हो तुम लोग अपने जज़्बात को अपने तक ही रखने का।
  • क्या काफ़ी हैं परमेश्वर के राज्य तक जाने के लिये तरीके तुम्हारे?
  • क्या लगता है तुम्हें, पा सकते हो अधिकार
  • प्रवेश करने का परमेश्वर के कार्य और वचनों की पावन धरती पर
  • उसके द्वारा बिना तुम्हारे तमाम शब्दों और कर्मों की परीक्षा के?
  • क्या दे सकता है धोखा कोई उसकी आँखों को?
  • कैसे बच सकते हैं नीच कर्म और तुच्छ बातें तुम्हारी उसकी नज़रों से?
  • नज़र रखता है परमेश्वर तमाम लोगों के दिलों पर
  • क्योंकि इंसान को बनाने से बहुत पहले,
  • थाम लिया था लोगों के दिलों को अपने हाथों में उसने।
  • देख लिया था लोगों के दिलों में बहुत पहले उसने,
  • इसलिये कैसे बच सकते हैं ख़्याल इंसान के दिल में उसकी नज़रों से?
  • कैसे मिल सकता है उन्हें पर्याप्त समय बचने का उसके आत्मा की तपन से,
  • उसके आत्मा की तपन से?
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • और पढ़ें:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया भजन के आॅडियो

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