परमेश्वर के वचनों का एक भजन
गरिमा है उसमें जो करता है आदर परमेश्वर का
I
गर नहीं है दिल ऐसा तुम्हारा,
जो माने भय और माने हुक्म परमेश्वर का,
गर नहीं समझते सत्य को तुम, जब करते हो काम,
होते हो सिद्धांतों से अनजान और दुविधा में,
तो होते हो बेग़ैरत तुम, बेग़ैरत तुम।
गरिमा से जियो, सत्यनिष्ठा से जियो,
और दिल रखो ऐसा जिसमें परमेश्वर के लिये श्रद्धा हो।
गरिमा से जियो, सत्यनिष्ठा से जियो,
और दिल रखो ऐसा जो हुक्म परमेश्वर का मानता हो, मानता हो।
II
सुने हैं तुमने जो बड़े- बड़े उपदेश, सिद्धांत जो तुम जानते हो,
ज्ञान जो पास है तुम्हारे, बिल्कुल इसके मायने नहीं होंगे।
लौट आओ वहाँ जो सचमुच सबसे ज़्यादा मायने रखता है।
सत्य का अनुसरण करो।
सत्य का अनुसरण करो, परमेश्वर का हुक्म मानो, भय मानो।
यही है आधार, पहला और सबसे अहम, सबसे अहम।
गरिमा से जियो, सत्यनिष्ठा से जियो,
और दिल रखो ऐसा जिसमें परमेश्वर के लिये श्रद्धा हो।
गरिमा से जियो, सत्यनिष्ठा से जियो,
और दिल रखो ऐसा जो हुक्म परमेश्वर का मानता हो, मानता हो।
"मसीह की बातचीतों के अभिलेख" से
और पढ़ें:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें