- कलीसिया का भजन
- अपना मार्ग हमें स्वयं चुनना है
- मसीह सत्य व्यक्त करता है अंत के दिनों में,
- मसीह परमेश्वर की धार्मिकता उजागर करता है अंत के दिनों में।
- सत्य है वो, धार्मिक है वो सबके लिये।
- इंसानों का परिणाम है निर्भर उनमें निहित सत्य पर।
- बाहर हो जाओगे अगर न चलोगे सत्य पर।
- I
- दिखावे का नेक बर्ताव,
- नुमाइंदगी नहीं करता जीवन होने की।
- इंसानियत उसी सच्चे इंसान में है,
- जो पालन करता है सत्य का।
- बग़ैर अच्छे कर्म या सत्य के, मुँह मोड़ लेता है परमेश्वर।
- धार्मिक है, पवित्र है स्वभाव परमेश्वर का,
- और इजाज़त नहीं देता अपमान की।
- बुरा करोगे, परमेश्वर का विरोध करोगे तो सज़ा पाओगे।
- हमें रास्ता अपना ख़ुद चुनना है,
- नहीं कर सकता इस काम को हमारे लिये कोई।
- हम सराहना पा सकते हैं परमेश्वर की,
- सिर्फ़ सत्य पर अमल कर, सच्चाई को जी कर।
- सच्चाई को जी कर, सच्चाई को जी कर।
- II
- अपनी आस्था में परमेश्वर की सराहना पाने की ख़ातिर,
- अहम है प्रेम करना, आज्ञापालन करना परमेश्वर का।
- समझदार हैं वो जो शुद्ध होने के लिये, स्वीकार करते हैं
- ताड़ना और न्याय परमेश्वर का।
- कोई कीमत, कोई अर्थ नहीं है
- धन-दौलत, ओहदे-शोहरत के पीछे भागने का।
- निभाते हैं जो फ़र्ज़ अपना, अमल करते हैं सत्य पर,
- वही हैं अनुयायी परमेश्वर के, परमेश्वर के।
- III
- उपदेश देना मगर सत्य पर अमल न करना,
- तुच्छ बना देता है हर चीज़ को।
- जी सकते हैं हम सच्चा जीवन तभी,
- जब परमेश्वर से सच्चा प्रेम करें, नेक गवाही दें।
- न्याय और ताड़ना, काट-छाँट से गुज़रना,
- है ये सब प्रेम परमेश्वर का।
- महिमा बढ़ाता है परमेश्वर की,
- शुद्धिकरण और हर इम्तहान में गवाही देना।
- IV
- दुख-दर्द और इम्तहान, दिखाते हैं साफ़गोई से,
- क्या सत्य की वास्तविकता है इंसान में।
- गवाही दे सकते हैं तभी हम परमेश्वर की,
- जब पा लें हम सत्य को, जान लें परमेश्वर को।
- सत्य को जब खोज लें, अपने स्वभाव को बदल लें हम,
- तभी पूरी तरह से कामयाब होते हैं हम।
- सत्य को जब खोज लें, अपने स्वभाव को बदल लें हम,
- तभी पूरी तरह से कामयाब होते हैं हम।
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