बुधवार, 28 नवंबर 2018

परमेश्वर के वचनों का एक भजन वह सत्य, मार्ग और जीवन है


I

जान नहीं सकता हमारा हर विचार उसके अलावा कोई, हमारी प्रकृति और सार की ऐसी समझ रख नहीं सकता उसके अलावा कोई, इंसान के विद्रोहीपन का, भ्रष्टता का न्याय कर नहीं सकता उसके अलावा कोई, कार्य कर नहीं सकता, बोल नहीं सकता स्वर्ग के परमेश्वर की ओर से उसके अलावा कोई। ये मामूली, महत्वहीन कोई, नकार दिया जिसे हमने, क्या हमारे ख़्यालों में बसा यीशु मसीह नहीं है, कामना जिसकी हम दिन-रात करते हैं? यही है वो! हमारा परमेश्वर! सत्य, मार्ग और जीवन, सत्य, मार्ग और जीवन!

II

परमेश्वर का अधिकार, बुद्धि और गरिमा है उसी के पास, किसी और के पास नहीं। परमेश्वर का स्वभाव और स्वरूप, उसी से निकलते हैं। वही ला सकता है रोशनी हमारे लिये, वही हमें राह दिखा सकता है, जो आज तक न दिखाए परमेश्वर ने कभी, ऐसे रहस्यों को उजागर कर सकता है। वही हमें शैतान के बंधन से, हमें हमारे भ्रष्ट स्वभाव से बचा सकता है। वो परमेश्वर की नुमाइंदगी करता है, परमेश्वर के दिल की वाणी बोलता है, परमेश्वर के प्रोत्साहन को, इंसान के न्याय को व्यक्त करता है। ये मामूली, महत्वहीन कोई, नकार दिया जिसे हमने, क्या हमारे ख़्यालों में बसा यीशु मसीह नहीं है, कामना जिसकी हम दिन-रात करते हैं? यही है वो! हमारा परमेश्वर! सत्य, मार्ग और जीवन, सत्य, मार्ग और जीवन!

III

वो नया युग लाया है, नया स्वर्ग और नई धरती लाया है। नया कार्य और हमारे लिये नई उम्मीद लाया है। जी रहे थे जो जीवन हम अस्पष्टता में, उसका अंत किया है, किया है। उद्धार के पथ को देखने लायक बनाया है। जीता है हमारे वजूद को उसने, और हमारे दिलों को पाया है। मन बना है अब चेतन हमारा, और फिर से जगी है आत्मा हमारी, हमारी। ये मामूली, महत्वहीन कोई, नकार दिया जिसे हमने, क्या हमारे ख़्यालों में बसा यीशु मसीह नहीं है, कामना जिसकी हम दिन-रात करते हैं? यही है वो! हमारा परमेश्वर! सत्य, मार्ग और जीवन, सत्य, मार्ग और जीवन!


"वचन देह में प्रकट होता है" से



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