- निर्मल और शुद्ध है जीवन-जल परमेश्वर के सिंहासन का
- I
- देहधारी बना परमेश्वर सत्य व्यक्त करता है।
- अपने लोगों को वो सींचता-पोषित करता है।
- हम सुनते हैं वाणी उसकी,
- और उन्नत किये जाते हैं सिंहासन के सम्मुख उसके,
- शामिल होने भोज में उसके।
- परमेश्वर के वचन करते हैं प्रबुद्ध और प्रकाशित हमें,
- ताकि देख सकें सच्चाई शैतान के हाथों दूषित हुए इंसान की।
- बचाया है परमेश्वर ने हमें,
- घुमा ली है पीठ हमने अपनी बड़े लाल अजगर की ओर से
- और कर दिया है दरकिनार असर शैतान का।
- परमेश्वर है सबसे सुंदर।
- हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आभार हो तुम्हारा और तुम्हारी जय हो!
- दिया है सत्य और जीवन हमें तुमने,
- और पथ हमारा उजला होता जाता, हर कदम के साथ।
- II
- हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर, तुम्हारी महिमा हो!
- बचा लिया अब तुमने हमें।
- तलवार की मानिंद हैं वचन तुम्हारे,
- जो करते हैं प्रकट दूषित स्वभाव हमारे।
- होते हैं उजागर रोशनी में, विद्रोही मन हमारे,
- भट्ठी का शुद्धिकरण करता है शुद्ध हमें।
- जानते हैं तुम्हारे स्वभाव के रोष को, प्रताप को हम,
- गिर जाते हैं श्रद्धा से हम सम्मुख तुम्हारे।
- हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आभार हो तुम्हारा और तुम्हारी जय हो!
- देखी है धार्मिकता और पवित्रता मैंने तुम्हारी
- और जीता जा चुका है दिल मेरा।
- III
- तुम्हारी सेवा की ख़ातिर घेर लेते हैं हम सिंहासन तुम्हारा,
- ताकि पूरी हो इच्छा धरती पर तुम्हारी।
- राह दिखाते हैं वचन तुम्हारे, हो जाते हैं पूर्ण हम,
- वश में करके मुश्किलों को, यातना को।
- जो भी व्यक्त करते, प्रकट करते तुम सत्य है वो,
- काफ़ी है ये गुज़र-बसर के लिये हमारी।
- अविरल बहता है जीवन-जल सिंहासन से,
- हो गये रूपांतरित हम नव-मानव में;
- मुदित है परमेश्वर, आनंदित हम।
- हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आभार हो तुम्हारा और तुम्हारी जय हो!
- समर्पित होते हैं सम्मुख तुम्हारे जीव हम
- और करते हैं आराधना तुम्हारी।
- करेंगे गुणगान तुम्हारा हम अनंत काल तक।
- "मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से
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