सत्य को जितना अधिक अमल में लाओगे उतनी तेज़ी से प्रगति करोगे
- I
- जिस सत्य की ज़रूरत है इंसान को, वो मिलता है परमेश्वर के वचन में।
- सत्य जो लाभकारी है, सहायक है, इंसान के लिये सबसे ज़्यादा।
- तुम्हारे तन को ज़रूरत जिसकी ऐसा पोषक-तत्व है सत्य,
- सत्य जो समाहित हो इंसान में।
- उसे मिलती है मदद इससे, सामान्य इंसानियत फिर से पाने में।
- अमल करोगे जितना ज़्यादा परमेश्वर के वचन पर,
- उतनी तेज़ी से खिलेगा जीवन तुम्हारा।
- परमेश्वर के वचन पर, अमल करोगे जितना ज़्यादा
- सत्य साफ़ होगा उतना ज़्यादा।
- II
- जितना ज़्यादा तुम्हारा कद बढ़ेगा, आध्यात्मिक जगत उतना साफ़ दिखेगा।
- शैतान पर जीत का तुम्हारा सामर्थ्य बढ़ेगा।
- परमेश्वर के वचन पर अमल करो, तुम सत्य को ग्रहण कर लोगे।
- समझ लिया परमेश्वर के वचन का पाठ,
- बस इतने से ही संतुष्ट हो जाते हैं अधिकतर लोग।
- फरीसियों की तरह, अभ्यास में इसकी गहराई का अनुभव किये बिना,
- देते हैं ध्यान सिद्धांतों पर।
- III
- "परमेश्वर का वचन जीवन है"
- कैसे हो सकता है सत्य ये कथन उनके लिये?
- अमल करके ही परमेश्वर के वचन पर,
- खिल सकता है जीवन इंसान का असल में।
- परमेश्वर के वचन को पढ़ने भर से, खिल नहीं सकता जीवन।
- परमेश्वर के वचन को पढ़ने भर से, खिल नहीं सकता जीवन।
- IV
- परमेश्वर के वचन को समझना, जीवन और कद पाना समझते हो अगर,
- तो तुम्हारी सोच विकृत है।
- अमल तुम करते हो जब सत्य पर,
- तो परमेश्वर के वचन की असल समझ तब आती है।
- अच्छी तरह समझ लो तुम इस बात को,
- अमल जब सत्य पर होगा, तभी समझोगे सच्चाई।
- अमल जब सत्य पर होगा, तभी समझोगे सच्चाई।
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