- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- वह संकल्प जो मोआब की संतानों के पास होना चाहिए
- I
- मोआब की संतानों से नहीं कोई
- अधिक पिछड़ा और भ्रष्ट।
- वो परमेश्वर को स्वीकारते नहीं।
- इसलिए केवल जब इन पर पाई जा सके विजय,
- केवल जब ये कर सकें प्रेम परमेश्वर को,
- केवल जब वो कर सकें उसकी स्तुति,
- तभी होगी वो गवाही विजय की, विजय की।
- अंत में तू कहेगा, "हम हैं शापित,
- हम हैं संतान मोअब की।
- इसे तो हम बदल, बदल सकते नहीं,
- क्योंकि ये थी आज्ञा परमेश्वर की, परमेश्वर की।
- लेकिन हमारा जीना और ज्ञान बदल सकता है,
- परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए हम हैं संकल्पित,
- परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए हम हैं संकल्पित।"
- II
- ये सच है कि तुम लोग पतरस नहीं,
- लेकिन जी सकते हो तुम पतरस की छवि,
- अय्यूब और पतरस के समान दे सकते हो गवाही।
- यही है सबसे बड़ी गवाही।
- अंत में तू कहेगा, "हम तो इस्राएली नहीं।
- हम हैं त्यागी गईं संतानें मोअब की।
- हम परमेश्वर के आशीषों के योग्य नहीं।"
- अंत में तू कहेगा, "हम हैं शापित,
- हम हैं संतान मोअब की।
- इसे तो हम बदल सकते नहीं,
- क्योंकि ये थी आज्ञा परमेश्वर की, परमेश्वर की।
- लेकिन हमारा जीना और ज्ञान बदल सकता है,
- परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए हम हैं संकल्पित,
- परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए हम हैं संकल्पित।"
- III
- "हम पतरस नहीं, हममें उसकी योग्यता नहीं।
- हम अय्यूब नहीं, हममें पौलुस का संकल्प नहीं।
- परमेश्वर को जितना समर्पण किया पौलुस ने,
- पौलुस ने उतना हम कर सकते नहीं, कर सकते नहीं।
- लेकिन फिर भी आज हमें उठाया है परमेश्वर ने, परमेश्वर ने।
- तो हमें संतुष्ट करना है परमेश्वर को, परमेश्वर को, और हैं हम तैयार भी।
- हम योग्य नहीं, लेकिन संकल्पित हैं हम फिर भी,
- और हैं हम तैयार, और हैं हम तैयार।"
- अंत में तू कहेगा, "हम हैं शापित,
- हम हैं संतान मोअब की।
- इसे तो हम बदल, बदल सकते नहीं,
- क्योंकि ये थी आज्ञा परमेश्वर की, परमेश्वर की।
- लेकिन हमारा जीना और ज्ञान बदल सकता है,
- परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए हम हैं संकल्पित,
- परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए हम हैं संकल्पित।"
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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- सर्वशक्तिमान परमेश्वर
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