- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- हटा दिया जाएगा उन्हें जो नहीं करते परमेश्वर के वचनों का अभ्यास
- I
- तुम्हारे स्वभाव में तब्दीली लाना है
- परमेश्वर के काम और वचन का अभिप्राय।
- महज़ इसे समझाना या पहचान कराना
- मकसद नहीं है उसका।
- इतना काफ़ी नहीं है, और यही सब-कुछ नहीं है।
- तुम ग्रहण कर सको अगर,
- तो आसान है समझना परमेश्वर के वचन।
- क्योंकि इंसानी ज़बान में लिखे हैं अधिकतर वचन।
- जो परमेश्वर चाहता है कि तुम जानो और करो,
- वो है ऐसा जो सामान्य इन्सान समझ सकता।
- इंसान परमेश्वर के वचनों में, हर तरह के सत्य का अनुभव करे।
- वो विस्तार से खोजे और जाँचे इसे।
- जो भी मिल जाए उसे लेने का इंतज़ार न करे,
- वरना मुफ़्तख़ोर के सिवा कुछ न होगा वो।
- जानता हो परमेश्वर के वचन के सत्य को, मगर अमल में न लाए वो,
- तो इसे प्रेम नहीं करता वो, आख़िरकार हटा दिया जाएगा उसको।
- II
- परमेश्वर जो कहता है अब साफ़ है।
- ये पारदर्शी और सुबोध है।
- बहुत-सी चीज़ों पर ध्यान दिलाता है परमेश्वर
- जो सोची नहीं हैं इंसान ने।
- इंसान के अलग-अलग हालात ज़ाहिर करता है वो।
- सबको अंगीकार करते हैं परमेश्वर के वचन।
- पूर्णमासी के चाँद की रोशनी की तरह साफ़ हैं वो।
- बहुत से मामलों को समझ सकता है इंसान।
- परमेश्वर के वचन को अमल में लाने की
- कोशिश करे इंसान।
- बस यही कमी है असल में इंसान में।
- इंसान परमेश्वर के वचनों में, हर तरह के सत्य का अनुभव करे।
- वो विस्तार से खोजे और जाँचे इसे।
- जो भी मिल जाए उसे लेने का इंतज़ार न करे,
- वरना मुफ़्तख़ोर के सिवा कुछ न होगा वो।
- जानता हो परमेश्वर के वचन के सत्य को, मगर अमल में न लाए वो,
- तो इसे प्रेम नहीं करता वो, आख़िरकार हटा दिया जाएगा उसको।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- और पढ़ें:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया
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