गुरुवार, 11 अप्रैल 2019

परमेश्वर के वचनों का एक भजन हटा दिया जाएगा उन्हें जो नहीं करते परमेश्वर के वचनों का अभ्यास



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • हटा दिया जाएगा उन्हें जो नहीं करते परमेश्वर के वचनों का अभ्यास

  • I
  • तुम्हारे स्वभाव में तब्दीली लाना है
  • परमेश्वर के काम और वचन का अभिप्राय।
  • महज़ इसे समझाना या पहचान कराना
  • मकसद नहीं है उसका।
  • इतना काफ़ी नहीं है, और यही सब-कुछ नहीं है।
  • तुम ग्रहण कर सको अगर,
  • तो आसान है समझना परमेश्वर के वचन
  • क्योंकि इंसानी ज़बान में लिखे हैं अधिकतर वचन।
  • जो परमेश्वर चाहता है कि तुम जानो और करो,
  • वो है ऐसा जो सामान्य इन्सान समझ सकता।
  • इंसान परमेश्वर के वचनों में, हर तरह के सत्य का अनुभव करे।
  • वो विस्तार से खोजे और जाँचे इसे।
  • जो भी मिल जाए उसे लेने का इंतज़ार न करे,
  • वरना मुफ़्तख़ोर के सिवा कुछ न होगा वो।
  • जानता हो परमेश्वर के वचन के सत्य को, मगर अमल में न लाए वो,
  • तो इसे प्रेम नहीं करता वो, आख़िरकार हटा दिया जाएगा उसको।
  • II
  • परमेश्वर जो कहता है अब साफ़ है।
  • ये पारदर्शी और सुबोध है।
  • बहुत-सी चीज़ों पर ध्यान दिलाता है परमेश्वर
  • जो सोची नहीं हैं इंसान ने।
  • इंसान के अलग-अलग हालात ज़ाहिर करता है वो।
  • सबको अंगीकार करते हैं परमेश्वर के वचन
  • पूर्णमासी के चाँद की रोशनी की तरह साफ़ हैं वो।
  • बहुत से मामलों को समझ सकता है इंसान।
  • परमेश्वर के वचन को अमल में लाने की
  • कोशिश करे इंसान।
  • बस यही कमी है असल में इंसान में।
  • इंसान परमेश्वर के वचनों में, हर तरह के सत्य का अनुभव करे।
  • वो विस्तार से खोजे और जाँचे इसे।
  • जो भी मिल जाए उसे लेने का इंतज़ार न करे,
  • वरना मुफ़्तख़ोर के सिवा कुछ न होगा वो।
  • जानता हो परमेश्वर के वचन के सत्य को, मगर अमल में न लाए वो,
  • तो इसे प्रेम नहीं करता वो, आख़िरकार हटा दिया जाएगा उसको।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
  • और पढ़ें:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया

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