- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- मसीह जो अभिव्यक्त करता है वो आत्मा है
- I
- मानव का सार जानता है देहधारी परमेश्वर,
- प्रकट करता है वो सब जो लोग करते हैं,
- मानव के भ्रष्ट स्वभाव, विद्रोही आचरण को,
- और भी बेहतर प्रकट करता है।
- वो नहीं रहता सांसारिक लोगों के साथ,
- पर जानता है उनकी प्रकृति और भ्रष्टाचार।
- ये उसका स्वरूप है।
- हालांकि वो दुनिया के साथ व्यवहार नहीं करता,
- फिर भी वो जानता है दुनिया से जुड़ने का हर एक नियम।
- क्योंकि वो समझता है मानवजाति को,
- उसकी प्रकृति को पूर्ण रूप से।
- II
- आत्मा के वर्तमान और अतीत के
- कार्य के बारे में वो जानता है,
- जो मानव की आँखें नहीं देख सकतीं,
- जो मानव के कान नहीं सुन सकते हैं।
- ये दर्शाता है चमत्कार जो मानव नहीं समझ सकता,
- और बुद्धि जो फ़लसफ़ा नहीं है।
- ये उसका स्वरूप है,
- मानव से छुपा और प्रकाशित भी।
- उसकी अभिव्यक्ति किसी असाधारण मानव सी नहीं,
- बल्कि अंतर्निहित अस्तित्व
- और आत्मा का गुण है।
- III
- वो दुनिया की यात्रा नहीं करता,
- फिर भी इसके बारे में वो सब जानता है।
- वो मिलता उनसे ज्ञान, अंतर्दृष्टि नहीं जिनमें,
- फिर भी उसके वचन महान लोगों से ऊपर हैं।
- वो नासमझ और सुन्न लोगों के बीच रहता है,
- जो नहीं जानते मानव की परम्पराओं को या कैसे जीते हैं।
- पर वो कह सकता है उन्हें सच्चा मानवीय जीवन जीने के लिए,
- प्रकट करते हुए, वे कितने नीच, कितने अधम हैं!
- ये उसका स्वरूप है,
- ख़ून और देह के लोगों से भी ऊँचा।
- मानव का ख़ुलासा और न्याय करना उसके अनुभव से नहीं है।
- जान कर, नफ़रत कर मानव की अवज्ञा से,
- उनके अधर्म का वो प्रकाशन करता है।
- उसका किया कार्य प्रकाशित करता है
- उसका स्वभाव और अस्तित्व मानव के समक्ष।
- मसीह को छोड़ कोई देह ऐसा कार्य नहीं कर सकता।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया
- सर्वशक्तिमान परमेश्वर
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