शनिवार, 9 मार्च 2019

कलीसिया का भजन और गहराई से प्रेम करना चाहता हूँ मैं परमेश्वर को



कलीसिया का भजन
और गहराई से प्रेम करना चाहता हूँ मैं परमेश्वर को


I
मेरे दिल को पिघला देता है परमेश्वर का प्रेम,
मेरी ग़लत धारणाओं को निर्मल कर देता है परमेश्वर का प्रेम।
उसके दिल को, उसके प्रबल प्रेम को समझता हूँ मैं।
अब से कभी शिकायत नहीं करूँगा मैं;
सारा खोया प्रेम पा गया हूँ फिर से मैं।
मुझ पर बहुत उपकार किया है परमेश्वर ने;
उसे अपना जीवन देना चाहता हूँ मैं।
II
सीमा है मेरे प्रेम की, पर असीम है प्रेम उसका।
इस मलिन जगत में वो आया है पूर्ण करने इंसान को,
दे रहा है अनंत जीवन का मार्ग इंसान को।
देता है वो अपना दिलो-दिमाग़ इंसान को।
बेशकीमती और महान है प्रेम उसका।
मुझ पर बहुत उपकार किया है परमेश्वर ने;
उसे अपना जीवन देना चाहता हूँ मैं।
III
मैं केवल परमेश्वर को प्रेम करने का अपना फ़र्ज़ निभाना चाहता हूँ,
उसके दिल को सुकून देने की ख़ातिर
सत्य का अनुसरण करना चाहता हूँ।
परमेश्वर की करुणा और प्रेम को मैं थामे रहूँगा;
उसके उपदेशों और योजना पर मैं ग़ौर करूँगा।
मुश्किलें, इम्तहान कोई बड़ी बात नहीं हैं;
चाहे तूफ़ान आए फिर भी मैं उसे प्रेम करूँगा।
ज़मीर से नहीं आता परमेश्वर के लिये मेरा प्रेम;
इम्तहानों से गुज़रे बिना, नहीं होगा कोई सच्चा प्रेम।
तहे-दिल से प्रेम करता हूँ अपने परमेश्वर को मैं।
शपथ लेता हूँ कभी उससे जुदा नहीं होऊँगा मैं।
कितना असली और सच्चा है प्रेम उसका।
सब-कुछ त्याग दूँ तो भी मैं हकदार नहीं इसका।
मैं पूरी तरह से, अधिक गहराई से उसे प्रेम करना चाहता हूँ।

Recommended:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

46. "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का वास्तविक अर्थ

झांग जुन शेन्यांग शहर, लियाओनिंग प्रांत अतीत में, मैं मानता था कि "परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह" का अर्थ परमेश्वर के साथ विश्व...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ओवरसीज हॉटलाइन