गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

परमेश्वर के वचनों का एक भजन परमेश्वर के आशीषों के प्रति अय्यूब का मनोभाव



I
अय्यूब को विश्वास था दिल में, उसके पास जो भी कुछ था
वह परमेश्वर ने दिया था न कि ख़ुद की मेहनत से।
उसने आशीषें यूँ न समझीं जिससे उठाया जाए फ़ायदा,
पर उस मार्ग पर बना रहा जिसे रखना चाहिए
जीवन सिद्धान्त के रूप में।
अय्यूब कभी बहुत ज़्यादा ख़ुश नहीं हुआ था
परमेश्वर के आशीष के कारण,
न ईश्वर का मार्ग तुच्छ समझा, न उसके अनुग्रह को भूला
क्योंकि उसे अक्सर आशीष मिलता रहा।
II
अय्यूब ने ईश्वर का आशीष संजोया, कहा-धन्यवाद।
लेकिन वह आसक्त न हुआ, और न ही ज़्यादा ढूँढ़ा।
उसने कभी कुछ भी न किया सिर्फ़ आशीषों की ख़ातिर,
न ईश्वर के आशीष के खोने या कमी होने पर दुखी हुआ, ओs.
अय्यूब कभी बहुत ज़्यादा ख़ुश नहीं हुआ था
परमेश्वर के आशीष के कारण,
न ईश्वर का मार्ग तुच्छ समझा, न उसके अनुग्रह को भूला
क्योंकि उसे अक्सर आशीष मिलता रहा, मिलता रहा।
वूs, वूaa, वूaa.
अय्यूब कभी बहुत ज़्यादा ख़ुश नहीं हुआ था
परमेश्वर के आशीष के कारण,
न ईश्वर का मार्ग तुच्छ समझा, न उसके अनुग्रह को भूला
क्योंकि उसे अक्सर आशीष मिलता रहा। ओs. ओs.

"वचन देह में प्रकट होता है" से
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