शनिवार, 26 जनवरी 2019

परमेश्वर के वचनों का एक भजन अधिक बोझ उठाओ ताकि परमेश्वर द्वारा अधिक आसानी से पूर्ण किये जा सको



  • I
  • जितना अधिक परमेश्वर की इच्छा के प्रति विचारशील तू रहेगा,
  • उतना ही बोझ तेरा बड़ा होगा।
  • जितना अधिक बोझ होगा,
  • उतना ही अधिक तेरा अनुभव भी होगा।
  • जब तू परमेश्वर की इच्छा के प्रति विचारशील रहेगा,
  • परमेश्वर तुझे ये दायित्व देगा।
  • वो तुझे उन बातों पर प्रबुद्ध करेगा
  • जिन्हें उसने तुझे सौंपा है।
  • परमेश्वर द्वारा ये दायित्व पाने के बाद,
  • इनसे जुड़े सत्य पर तू ध्यान देगा,
  • परमेश्वर के वचनों को खाते पीते हुए।
  • इनसे जुड़े सत्य पर तू ध्यान देगा।
  • अगर तेरा दायित्व जुड़ा है
  • भाई बहनों की आध्यात्मिक ज़िंदगियों से,
  • तो ये परमेश्वर ने तुझे है सौंपा।
  • प्रतिदिन इसके साथ तू प्रार्थना करेगा।
  • II
  • परमेश्वर जो करता है तुझे वो सौंपा गया है,
  • उसकी इच्छानुसार तू काम करना चाहता है।
  • इस तरह परमेश्वर का बोझ तेरा अपना बनता है,
  • यही तो परमेश्वर के बोझ को उठाना है।
  • परमेश्वर के वचनों को खाते पीते समय
  • जब तू बोझ ढोता है उस समय,
  • तू परमेश्वर के वचनों का सार समझ पाता है,
  • उसकी इच्छा का ध्यान रखता और अपना मार्ग पाता है।
  • इसलिए परमेश्वर से तुझे प्रार्थना करनी चाहिए
  • ताकि तेरा बोझ और बढ़ जाए,
  • और बड़ी चीज़ें वो तुझे सौंपे,
  • ताकि तेरा अभ्यास का पथ बड़ा बन जाए,
  • परमेश्वर के वचनों को खाने से पायेगा तू ज़्यादा,
  • उसके वचनों के सार को समझेगा,
  • पवित्र आत्मा से प्रेरित होकर,
  • तू ज़्यादा स्वीकार कर पायेगा।
  • परमेश्वर के वचनों को खाना पीना, उसके बोझ को स्वीकारना,
  • प्रार्थना का अभ्यास करना, उसने जो सौंपा उसे स्वीकारना,
  • ये सब वो पथ पाने के लिए हैं, जो है तेरे सामने।
  • परमेश्वर के लिए जितना अधिक बोझ तू उठाएगा,
  • उतनी आसानी से पूर्णता पायेगा,
  • पूर्णता पायेगा, पूर्णता पायेगा।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से

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