- परमेश्वर को प्रेम करने का पथ उजागर करता है सत्य और झूठ को
- I
- प्रेम करते हैं जो परमेश्वर को आज्ञापालन उसका वे करते हैं।
- करुणा दिल उनका दिखाता, है दिखाता है।
- जो नहीं करते प्रेम उसको, करते हैं विद्रोह ख़िलाफ़ उसके,
- करते हैं प्रयास अपनी नियति के लिये,
- बिना ज़मीर के, बिना ज़मीर के।
- करते हैं प्रेम जो परमेश्वर को, धार्मिकता चाहते हैं,
- प्यार सत्य को करते हैं वचन के अनुसार उसकेजीते हैं।
- दिल होता है सच्चा, निष्ठावान पवित्र उनका।
- त्याग नहीं सकते वो परमेश्वर को सदा के लिये।
- II
- प्रेम करते नहीं जो परमेश्वर को,
- कपटी हैं, धूर्त हैं कुचक्री सदा हैं वो,
- सोचते हैं केवल अपने हित की वो।
- करते हैं प्रेम जो परमेश्वर को, उसके दिल का ख़्याल करते हैं वो,
- खपाते हैं ख़ुद को, सहते हैं मुश्किलें, शिकायत कभी नहीं करते वो,
- कभी करते नहीं परवाह किसी इनाम की।
- III
- करते हैं प्रेम जो परमेश्वर को, मानते हैं भय उसका।
- सत्य को सचमुच समझकर एक बार, करते हैं अमल उस पर वो।
- हाँ, सत्य को सचमुच समझकर एक बार।
- जो करते नहीं प्रेम उसको, होता नहीं परमेश्वर दिल में उनके।
- होती है नफ़रत उन्हें सत्य से, काम करते हैं वो दुराग्रही होकर।
- इतने घिनौने होते हैं।
- करते हैं प्रेम जो परमेश्वर को, खोजते रहते हैं इच्छा उसकी।
- वो करते हैं पालन पूरी तरह
- वचन और कर्म उनके होते हैं उसूलों के मुताबिक।
- एक हो जाते हैं दिल उनके परमेश्वर से,
- बाँटते हैं विचार, सरोकार उसके,
- करते हैं विचार हर चीज़ में उसकी इच्छा का,
- गवाही देते हैं मुश्किलों में, इम्तहानों में, इम्तहानों में।
- IV
- प्रेम करते हैं जो परमेश्वर को, खोज करते हैं जानने की।
- बदलना चाहते हैं स्वभाव अपना।
- हो जाते हैं वे समर्पित बिना शिकायत, उसकी व्यवस्था को।
- दिल में जिनके है प्रेम परमेश्वर का, बदलते नहीं वो।
- परमेश्वर के काम में होता है उजागर हर कोई।
- दमकते हैं दर्पण की तरह वचन उसके।
- जाँच सकता है हर कोई ख़ुद को, उसके खुलासे में,
- जान सकता है हकीकत में कौन है वो, कौन है वो।
- "मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से
- Source From:सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-आराधना गीत
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