प्रभु यीशु का अनुकरण करो
- I
- पूरा किया परमेश्वर के आदेश को यीशु ने,
- हर इंसान के छुटकारे के काम को,
- क्योंकि उसने परमेश्वर की इच्छा की परवाह की,
- इसमें न उसका स्वार्थ था, न योजना थी।
- परमेश्वर की योजना को केंद्र में रखा उसने।
- स्वर्गिक पिता की इच्छा की खोज करते हुए,
- प्रार्थना की स्वर्गिक पिता से उसने।
- उसने खोज की, और प्रार्थना की सदा।
- गर यीशु की तरह, परवाह करो परमेश्वर की तुम सभी,
- और मोड़ लो मुँह देह-सुख से तुम,
- तो सौंप देगा परमेश्वर सेवा कर पाने का अहम काम तुम्हें।
- तो सौंप देगा परमेश्वर सेवा कर पाने का अहम काम तुम्हें।
- II
- प्रार्थना की उसने, "हे परमपिता परमेश्वर!
- अपनी इच्छा को पूरा कर।
- मेरे इरादों के मुताबिक नहीं,
- योजना पूरी हो तेरी तू ऐसे काम कर।
- तू उस कमज़ोर इंसान की परवाह न कर,
- जो चींटी की तरह है तेरे हाथों में।
- है मेरी कामना मैं वो करूँ जो इच्छा है तेरी।
- जो तू चाहे वो कर मुझमें।"
- गर यीशु की तरह, परवाह करो परमेश्वर की तुम सभी,
- और मोड़ लो मुँह देह-सुख से तुम,
- तो सौंप देगा परमेश्वर सेवा कर पाने का अहम काम तुम्हें।
- तो सौंप देगा परमेश्वर सेवा कर पाने का अहम काम तुम्हें।
- III
- यरूशलेम की राह पर,
- महसूस की व्यथा यीशु ने,
- फिर भी, निभाया वचन अपना, बढ़ता गया उस ओर जहाँ,
- सलीब पर चढ़ाया जाना था उसे।
- सलीब पर आख़िरकार, चढ़ा दिया गया उसे,
- बन गया छवि पापमय देह की,
- छुटकारे का काम पूरा करके,
- मौत की बेड़ियों से ऊपर उठ गया वो।
- गर यीशु की तरह, परवाह करो परमेश्वर की तुम सभी,
- और मोड़ लो मुँह देह-सुख से तुम,
- तो सौंप देगा परमेश्वर सेवा कर पाने का अहम काम तुम्हें।
- तो सौंप देगा परमेश्वर सेवा कर पाने का अहम काम तुम्हें।
- IV
- यीशु तैंतीस बरस जिया,
- परमेश्वर की संतुष्टि के लिये सबकुछ किया।
- नफ़े-नुकसान की कभी परवाह नहीं की,
- पूरी की परमपिता परमेश्वर की इच्छा मगर।
- सेवा प्रभु यीशु की
- थी परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप सदा।
- छुटकारे के दायित्व को इसलिये,
- वो निभाने के काबिल था।
- अपार यातनाएं सहीं उसने,
- जाने कितनी बार शैतान ने लालच दिया उसे।
- मगर मायूस न हुआ वो कभी।
- भरोसे और प्यार में ये काम दिया परमेश्वर ने उसे।
- गर यीशु की तरह, परवाह करो परमेश्वर की तुम सभी,
- और मोड़ लो मुँह देह-सुख से तुम,
- तो सौंप देगा परमेश्वर सेवा कर पाने का अहम काम तुम्हें।
- तो सौंप देगा परमेश्वर सेवा कर पाने का अहम काम तुम्हें।
- ऐसे ही वक्त में क्या
- तुम साहस करोगे कहने का, तुम करते हो इच्छा पूरी उसकी,
- करते हो उसके आदेश को पूरा,
- कि सही मायनों में करते हो सेवा परमेश्वर की।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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