शनिवार, 30 मार्च 2019

परमेश्वर के वचनों का एक भजन देहधारी परमेश्वर की जो मानते हैं, वो ही पूर्ण बन सकते हैं



  • परमेश्वर के वचनों का एक भजन
  • देहधारी परमेश्वर की जो मानते हैं, वो ही पूर्ण बन सकते हैं

  • I
  • देहधारी परमेश्वर की मानो, वो तुम्हें पूर्ण बना देगा।
  • आसमां के परमेश्वर को मानोगे तो कुछ ना पाओगे।
  • क्योंकि आसमां का नहीं, धरती का परमेश्वर ही मानव से वादे करता है।
  • धरती का परमेश्वर ही दुआएं देता है।
  • धरती के परमेश्वर को मामूली ना समझो,
  • और आसमां के परमेश्वर को बड़ा मत बनाओ,
  • क्योंकि परमेश्वर के साथ ये अन्याय है।
  • आसमां का परमेश्वर ऊंचा है और अद्भुत है।
  • वो ग़ज़ब का समझदार है, मगर उसका वजूद नहीं है।
  • धरती का परमेश्वर मामूली है, मामूली उसकी सोच है।
  • उसके काम नहीं हैं प्रभावशाली, मामूली हैं काम और सच्चे हैं।
  • वो ना गर्जना के ज़रिये बात करता है, ना आंधी-तूफ़ान को बुलाता है।
  • इंसानों के बीच में वो रहता है, इंसान के रूप में भगवान है।
  • II
  • उस परमेश्वर को ना बढ़ाओ, ना चढ़ाओ, जिसे तुम समझते हो,
  • जो तुम्हारी कल्पना से मेल खाता है।
  • उस परमेश्वर को नीची नज़र से ना देखो,
  • जिसे तुम नकारते हो, जो तुम्हारी कल्पना से बाहर है।
  • ऐसा ना करो, ऐसा बिल्कुल ना करो।
  • ये इंसान की नाफ़र्मानी है, परमेश्वर के विरोध की बड़ी वजह है।
  • हां, यही मूल है।
  • हां, यही मूल है।
  • हां, यही मूल है।
  • हां, यही मूल है।
  •  
  • "वचन देह में प्रकट होता है" से
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