- परमेश्वर के वचनों का एक भजन
- देहधारी परमेश्वर की जो मानते हैं, वो ही पूर्ण बन सकते हैं
- I
- देहधारी परमेश्वर की मानो, वो तुम्हें पूर्ण बना देगा।
- आसमां के परमेश्वर को मानोगे तो कुछ ना पाओगे।
- क्योंकि आसमां का नहीं, धरती का परमेश्वर ही मानव से वादे करता है।
- धरती का परमेश्वर ही दुआएं देता है।
- धरती के परमेश्वर को मामूली ना समझो,
- और आसमां के परमेश्वर को बड़ा मत बनाओ,
- क्योंकि परमेश्वर के साथ ये अन्याय है।
- आसमां का परमेश्वर ऊंचा है और अद्भुत है।
- वो ग़ज़ब का समझदार है, मगर उसका वजूद नहीं है।
- धरती का परमेश्वर मामूली है, मामूली उसकी सोच है।
- उसके काम नहीं हैं प्रभावशाली, मामूली हैं काम और सच्चे हैं।
- वो ना गर्जना के ज़रिये बात करता है, ना आंधी-तूफ़ान को बुलाता है।
- इंसानों के बीच में वो रहता है, इंसान के रूप में भगवान है।
- II
- उस परमेश्वर को ना बढ़ाओ, ना चढ़ाओ, जिसे तुम समझते हो,
- जो तुम्हारी कल्पना से मेल खाता है।
- उस परमेश्वर को नीची नज़र से ना देखो,
- जिसे तुम नकारते हो, जो तुम्हारी कल्पना से बाहर है।
- ऐसा ना करो, ऐसा बिल्कुल ना करो।
- ये इंसान की नाफ़र्मानी है, परमेश्वर के विरोध की बड़ी वजह है।
- हां, यही मूल है।
- हां, यही मूल है।
- हां, यही मूल है।
- हां, यही मूल है।
- "वचन देह में प्रकट होता है" से
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- सर्वशक्तिमान परमेश्वर
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